मीठा खाने का भी होता है सही वक्त! डॉक्टर ने बताया कब खाएं मिठाई, ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा होगा कम

Saroj kanwar
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अगर आपको खाने के बाद कुछ मीठा खाने की आदत है, तो यह जानना जरूरी है कि मिठाई या मीठी चीजें खाने का सही समय आखिर क्या है। क्या भोजन खत्म करने के बाद मीठा खाना बेहतर होता है या इसे खाने से पहले लिया जा सकता है? इसको लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट की राय और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

खाने के बाद मीठा खाना कितना सही?

भारत में खाना खत्म करने के बाद मिठाई, मीठी दही या कोई डेजर्ट खाने का चलन काफी आम है। हालांकि, मीठा कब खाना चाहिए, इसका कोई एक नियम सभी लोगों पर लागू नहीं होता। इसका असर व्यक्ति की सेहत, खान-पान, ब्लड शुगर और स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों पर निर्भर कर सकता है।

डॉ. पीयूष मिश्रा, जनरल फिजिशियन और इम्यूनाइजेशन ऑफिसर, नॉर्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट, नई दिल्ली के मुताबिक, मीठी चीजों में मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट और शुगर होती है। भोजन के साथ या उसके बाद मीठा खाने पर शरीर में शुगर के अवशोषण का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आपने भोजन में क्या-क्या शामिल किया है।

संतुलित भोजन के बाद मीठा लेना हो सकता है बेहतर

अगर आपकी डाइट में फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं, तो भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में मीठा लेने से शुगर का अवशोषण अपेक्षाकृत धीमा हो सकता है। इससे ब्लड शुगर में अचानक तेज उछाल आने की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।

खासकर जिन लोगों को डायबिटीज है या जो वजन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें मीठे की मात्रा और कुल डाइट पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

खाली पेट मीठा खाने से क्यों बचना चाहिए?

खाली पेट ज्यादा मीठी चीज खाने से शरीर में ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। इसके बाद कुछ लोगों को ऊर्जा में उतार-चढ़ाव या दोबारा कुछ खाने की इच्छा महसूस हो सकती है।

इसलिए अगर आपको मीठा पसंद है, तो इसे खाली पेट ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय संतुलित भोजन के बाद सीमित मात्रा में लेना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

भोजन से पहले मीठा खाएंगे तो क्या असर होगा?

भोजन से पहले मिठाई या कोई बहुत मीठी चीज खाने पर शरीर को पहले ही काफी मात्रा में शुगर मिल जाती है। इसके अलावा, इससे आपका कुल कैलोरी सेवन भी बढ़ सकता है।

अगर किसी कारण से आप भोजन से पहले मीठा लेते हैं, तो बाकी भोजन में फाइबर और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है। साथ ही मीठे की मात्रा सीमित रखना जरूरी है।

मीठा खाते समय इन बातों का रखें ध्यान

मीठा पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। अगर आप स्वस्थ हैं और संतुलित डाइट लेते हैं, तो कभी-कभार थोड़ी मात्रा में अपनी पसंद की मिठाई का आनंद लिया जा सकता है।

ध्यान रखें:

  • मीठा सीमित मात्रा में ही खाएं।
  • खाली पेट बहुत ज्यादा शुगर लेने से बचें।
  • भोजन में फाइबर और प्रोटीन को पर्याप्त जगह दें।
  • रोजाना मीठी चीजों और मीठे पेय पदार्थों का ज्यादा सेवन न करें।
  • डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार डाइट तय करें।

आयुर्वेद में मीठा खाने को लेकर क्या कहा गया है?

आयुर्वेद में भोजन के स्वादों और उनके सेवन के क्रम को लेकर अलग दृष्टिकोण मिलता है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार मधुर यानी मीठा स्वाद भोजन की शुरुआत में लेने की बात कही गई है। इसके पीछे पाचन और भोजन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से जुड़ी पारंपरिक अवधारणाएं बताई जाती हैं।

हालांकि, आधुनिक पोषण विज्ञान में मीठा खाने का समय तय करने के बजाय उसकी मात्रा, भोजन की गुणवत्ता और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

सफेद चीनी की जगह क्या ले सकते हैं?

कई लोग सफेद चीनी की जगह ब्राउन शुगर, गुड़ या फलों को बेहतर विकल्प मानते हैं। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि ब्राउन शुगर और गुड़ भी मुख्य रूप से शुगर के ही स्रोत हैं। इसलिए इन्हें भी जरूरत से ज्यादा खाना सही नहीं है।

मीठे की इच्छा होने पर ताजे फल एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि इनमें प्राकृतिक शुगर के साथ फाइबर, विटामिन और अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं। वहीं, ड्राई फ्रूट्स भी पोषण से भरपूर होते हैं, लेकिन इनमें कैलोरी अधिक हो सकती है, इसलिए इनकी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

निष्कर्ष

मीठा खाने का कोई एक ऐसा समय नहीं है जो हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सही हो। सामान्य तौर पर संतुलित भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में मीठा लेना खाली पेट ज्यादा शुगर लेने की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि मीठे की मात्रा सीमित हो और आपकी पूरी डाइट संतुलित रहे।

अगर आपको डायबिटीज, प्री-डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी कोई समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसे किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर की सलाह का विकल्प न समझें। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या डायबिटीज की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

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