पहली सैलरी मिलते ही FD, RD या SIP? जानें कहां निवेश करने पर मिलेगा ज्यादा फायदा

Saroj kanwar
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First Salary Investment: पहली सैलरी अकाउंट में आने का उत्साह हर किसी के लिए खास होता है। इस पैसे से नई चीजें खरीदने, दोस्तों के साथ घूमने या अपनी पसंद की कोई चीज लेने का मन करता है। लेकिन अगर आप अपनी पहली कमाई का कुछ हिस्सा सही जगह निवेश करना शुरू कर दें, तो यही छोटी शुरुआत भविष्य में बड़ी रकम तैयार करने में मदद कर सकती है।

पहली सैलरी के साथ अक्सर सवाल होता है कि FD, RD या SIP में से किसमें निवेश करना बेहतर रहेगा? दरअसल, इसका कोई एक तय जवाब नहीं है। सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि आपका लक्ष्य क्या है, पैसे की जरूरत कब पड़ेगी और आप कितना जोखिम लेने के लिए तैयार हैं।

सबसे पहले तय करें निवेश का मकसद

सिर्फ ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद में निवेश करना सही रणनीति नहीं है। पैसा लगाने से पहले यह तय करें कि आपको रकम कितने समय बाद चाहिए और आपका वित्तीय लक्ष्य क्या है।

फाइनेंशियल एक्सपर्ट Saumeet Nanda के अनुसार, निवेश का चुनाव व्यक्ति के वित्तीय लक्ष्य, समय अवधि और पैसों की जरूरत को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

निवेश शुरू करने से पहले बनाएं Emergency Fund

अगर पहली सैलरी पाने के बाद आपके पास कोई बचत नहीं है, तो निवेश के साथ-साथ Emergency Fund तैयार करना भी जरूरी है। आमतौर पर 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम अलग रखने की सलाह दी जाती है।

इस पैसे को ऐसे विकल्प में रखना बेहतर होता है जहां जोखिम कम हो और जरूरत पड़ने पर रकम आसानी से निकाली जा सके।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि Emergency Fund पूरी तरह तैयार होने तक निवेश बिल्कुल न करें। आप अपनी क्षमता के अनुसार हर महीने 500 या 1,000 रुपये की छोटी SIP से निवेश की आदत भी शुरू कर सकते हैं।

FD कब आपके लिए सही हो सकती है?

अगर आपके पास एकमुश्त रकम मौजूद है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव से बचते हुए एक तय ब्याज चाहते हैं, तो Fixed Deposit यानी FD एक विकल्प हो सकता है।

FD का इस्तेमाल उन पैसों के लिए किया जा सकता है जिनकी आपको निकट भविष्य में जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, निवेश करने से पहले ब्याज दर के साथ टैक्स और महंगाई के असर को भी ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि इससे आपका वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है।

हर महीने बचत करनी है तो RD पर विचार करें

अगर आपके पास निवेश करने के लिए एक साथ बड़ी रकम नहीं है, लेकिन आप हर महीने एक निश्चित राशि बचा सकते हैं, तो Recurring Deposit यानी RD उपयोगी हो सकती है।

मान लीजिए आपको कुछ महीनों या थोड़े समय बाद लैपटॉप खरीदना है, किसी कोर्स की फीस जमा करनी है या किसी अन्य तय खर्च के लिए पैसा जुटाना है। ऐसे छोटे अवधि वाले लक्ष्यों के लिए RD पर विचार किया जा सकता है।

फाइनेंशियल एक्सपर्ट Pankaj Kumar Gera के मुताबिक, करीब 6 महीने जैसे शॉर्ट-टर्म गोल के लिए RD एक उपयुक्त विकल्प हो सकती है।

लंबे समय के लक्ष्य के लिए SIP क्यों?

अगर आपका मकसद लंबे समय में संपत्ति तैयार करना है और आप बाजार से जुड़े जोखिम को समझते हैं, तो Systematic Investment Plan यानी SIP एक विकल्प हो सकती है।

SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में नियमित अंतराल पर निवेश किया जाता है। इसमें रिटर्न पहले से तय या गारंटीड नहीं होता, क्योंकि म्यूचुअल फंड बाजार के प्रदर्शन से जुड़े होते हैं। हालांकि, लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना के साथ कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।

क्या 500 रुपये से भी SIP शुरू की जा सकती है?

निवेश की शुरुआत करने के लिए बड़ी रकम का इंतजार करना जरूरी नहीं है। कई लोगों के लिए शुरुआती दौर में निवेश की रकम से ज्यादा महत्वपूर्ण नियमित निवेश की आदत बनाना होता है।

500 या 1,000 रुपये जैसी छोटी रकम से शुरुआत करके आप अपने बजट में निवेश को शामिल कर सकते हैं। समय के साथ जब आपकी सैलरी बढ़े, तो निवेश की रकम भी धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।

सैलरी का कितना हिस्सा निवेश करना चाहिए?

पर्सनल फाइनेंस में लोकप्रिय 50:30:20 नियम के तहत कमाई का करीब 50% जरूरी खर्चों, 30% लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चों और 20% बचत व निवेश के लिए रखने का सुझाव दिया जाता है।

हालांकि, हर व्यक्ति की आय और जिम्मेदारियां अलग होती हैं। जिन युवाओं पर शुरुआती करियर में कम वित्तीय जिम्मेदारियां हैं, वे अपनी क्षमता के अनुसार 30 से 40% तक रकम बचत और निवेश के लिए रखने का लक्ष्य बना सकते हैं।

पहली सैलरी के साथ बनाएं निवेश की आदत

पहली सैलरी से निवेश शुरू करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि आपने FD, RD या SIP में से कौन सा विकल्प चुना। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप कितनी जल्दी शुरुआत करते हैं, कितनी नियमितता से निवेश करते हैं और समय के साथ निवेश कितना बढ़ाते हैं।

सैलरी बढ़ने पर निवेश की रकम में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी करना एक अच्छी रणनीति हो सकती है। छोटी रकम से शुरू किया गया नियमित निवेश लंबे समय में बड़ी वित्तीय आदत में बदल सकता है।

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