UPI पेमेंट अपडेट: लोकसभा में बिल पास, क्या अब UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज? जानें पूरी जानकारी

Saroj kanwar
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UPI Payment Update: अगर आप रोजाना UPI के जरिए पेमेंट करते हैं, तो इससे जुड़ी यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। देश में एक बार फिर UPI ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने की चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, संसद में Payment and Settlement Systems Act में संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव सामने आया है। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में UPI पेमेंट पर भी MDR लगाया जा सकता है।

हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल UPI पर कोई शुल्क लागू नहीं किया गया है। इस संबंध में अंतिम फैसला संबंधित समिति द्वारा आगे लिया जाएगा। इसलिए आम लोगों को अभी घबराने की जरूरत नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

सरकार ने संसद में Payment and Settlement Systems Act में कुछ बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इन संशोधनों से भविष्य में जरूरत पड़ने पर डिजिटल पेमेंट सिस्टम में MDR लागू करने के लिए कानूनी आधार तैयार हो सकता है।

लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि अब UPI से भुगतान करने पर तुरंत शुल्क देना शुरू हो जाएगा। अभी तक न तो MDR की कोई दर तय हुई है, न यह बताया गया है कि किन ट्रांजैक्शन पर इसे लागू किया जाएगा और न ही इसके लागू होने की तारीख घोषित हुई है।

MDR क्या होता है?

Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारी या दुकानदार से लिया जाता है। कार्ड या अन्य डिजिटल माध्यम से भुगतान होने पर बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने में लागत आती है। इसी लागत की भरपाई के लिए MDR लिया जाता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR सामान्य तौर पर व्यापारी से लिया जाता है, सीधे ग्राहक से नहीं।

क्या UPI इस्तेमाल करने पर आम लोगों को पैसे देने होंगे?

फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, अगर भविष्य में MDR लागू भी किया जाता है, तो इसका भुगतान सीधे उपभोक्ताओं से लेने के बजाय व्यापारियों पर लागू किया जा सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यापारियों की लागत बढ़ती है, तो कुछ कारोबारी इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए, वे वस्तुओं और सेवाओं की कीमत बढ़ा सकते हैं या ग्राहकों को नकद भुगतान की ओर प्रोत्साहित कर सकते हैं।

सरकार ने क्या कहा?

सरकार की ओर से अभी तक UPI पर MDR लागू करने का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वित्त मंत्री के अनुसार, इस मामले पर आगे निर्णय NPCI की UPI और Service Charges से संबंधित Steering Committee द्वारा लिया जाएगा।

संबंधित संशोधन विधेयक के संसद से पारित होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। MDR लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य डिजिटल पेमेंट के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों में निवेश के लिए एक टिकाऊ वित्तीय व्यवस्था तैयार करना बताया जा रहा है।

UPI पर अभी कोई चार्ज क्यों नहीं लगता?

भारत में UPI को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जनवरी 2020 से RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर MDR समाप्त कर दिया था। इसका मकसद डिजिटल भुगतान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना और नकदी पर निर्भरता कम करना था।

इसी व्यवस्था के कारण आज करोड़ों लोग रोजाना UPI के जरिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के भुगतान करते हैं।

पेमेंट कंपनियां MDR की मांग क्यों कर रही हैं?

डिजिटल पेमेंट कंपनियों का तर्क है कि हर UPI ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने में खर्च होता है। पेमेंट सिस्टम को सुचारु रखने के लिए सर्वर, टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और अन्य तकनीकी सुविधाओं पर लगातार निवेश करना पड़ता है।

UPI ट्रांजैक्शन की संख्या लगातार बढ़ने के साथ सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत भी बढ़ती है। कंपनियों का कहना है कि MDR जैसी व्यवस्था से इन खर्चों को पूरा करने के लिए स्थायी आय का स्रोत मिल सकता है।

कार्ड पेमेंट पर कितना MDR लगता है?

कार्ड से होने वाले भुगतान में पहले से ही MDR की व्यवस्था मौजूद है। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR करीब 1.5% तक, जबकि डेबिट कार्ड पर यह लगभग 0.9% के आसपास हो सकता है।

इसके मुकाबले वर्तमान व्यवस्था में UPI पेमेंट पर MDR नहीं लिया जाता है।

RBI का क्या कहना है?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने UPI पर MDR के मुद्दे पर फिलहाल कोई निश्चित टिप्पणी करना जल्दबाजी बताया है। हालांकि, डिजिटल पेमेंट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए एक मजबूत और टिकाऊ फंडिंग मॉडल की आवश्यकता भविष्य में पड़ सकती है।

देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन का दायरा लगातार बढ़ रहा है, इसलिए लंबे समय तक इस पूरे सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए वित्तीय व्यवस्था पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है।

क्या शुरुआत में बड़े कारोबारियों पर लागू हो सकता है MDR?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में संभावना जताई गई है कि यदि भविष्य में UPI पर MDR लागू किया जाता है, तो इसकी शुरुआत बड़े व्यापारियों या अधिक मूल्य वाले ट्रांजैक्शन से की जा सकती है।

हालांकि, यह केवल संभावित विकल्प है। सरकार ने अभी तक यह आधिकारिक रूप से नहीं बताया है कि MDR किन कारोबारियों या किस राशि के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।

BJP सांसद ने क्या कहा?

BJP सांसद और व्यापारियों के संगठन CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि पहले विधेयक के अंतिम प्रावधानों को स्पष्ट रूप से सामने आना जरूरी है। उनका मानना है कि सरकार यदि किसी तरह का बदलाव करती है तो उसके पीछे कोई ठोस वजह होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर सेवाएं मिलने की स्थिति में मामूली शुल्क को स्वीकार किया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि भविष्य में UPI भुगतान पर शुल्क लगाकर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा सकता है।

सोशल मीडिया पर क्या है लोगों की राय?

UPI पर MDR की संभावित वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि शुल्क व्यापारियों से लिया गया, तो वे किसी न किसी तरीके से इसका भार ग्राहकों पर डाल सकते हैं।

दूसरी ओर, कई यूजर्स का मानना है कि UPI की सबसे बड़ी खासियत इसका आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क वाला इस्तेमाल है। यदि इस पर चार्ज लगाया जाता है, तो लोगों का एक वर्ग दोबारा नकद भुगतान की ओर जा सकता है।

क्या RBI खुद UPI का खर्च उठा सकता है?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि UPI सिस्टम को चलाने और मजबूत करने में RBI की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है और उसके पास आवश्यक संसाधन भी हैं। दूसरी तरफ, बैंकिंग और पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के कारण सिस्टम को बनाए रखने और अपग्रेड करने पर काफी खर्च होता है।

इसी वजह से लंबे समय के लिए एक सस्टेनेबल फंडिंग मॉडल की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है।

MDR लागू हुआ तो क्या बदलेगा?

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भविष्य में UPI पर MDR वास्तव में लागू होगा या नहीं। इसके लिए संसद में संबंधित विधेयक की प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित समिति के फैसले का इंतजार करना होगा।

यदि MDR लागू किया जाता है, तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल होंगे—यह किन व्यापारियों पर लागू होगा, कितनी राशि के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, MDR की दर कितनी होगी और इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों पर कितना पड़ेगा।

निष्कर्ष

UPI पर MDR को लेकर चर्चा जरूर शुरू हो गई है, लेकिन फिलहाल UPI पेमेंट पर कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है। संसद में Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के पारित होने से भविष्य में MDR जैसी व्यवस्था के लिए कानूनी रास्ता तैयार हो सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि अब हर UPI भुगतान पर चार्ज लगेगा।

अभी तक सरकार ने न तो MDR की दर तय की है और न ही यह घोषित किया है कि इसे कब और किन ट्रांजैक्शन पर लागू किया जाएगा। यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो मौजूदा चर्चा के अनुसार इसका सीधा भुगतान व्यापारी द्वारा किया जा सकता है, न कि ग्राहक द्वारा।

हालांकि, व्यापारियों पर बढ़ने वाली लागत का कुछ हिस्सा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों तक पहुंच सकता है। इसलिए फिलहाल UPI यूजर्स के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि घबराने की जरूरत नहीं है—UPI पर नए चार्ज को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

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