नई दिल्ली: नौकरी करने वाले लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF और कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन हैं। नौकरी के दौरान कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा EPF खाते में जमा किया जाता है। नियोक्ता भी 12% योगदान करता है, लेकिन Employer के इस योगदान का पूरा हिस्सा EPF में नहीं जाता। इसका एक हिस्सा कर्मचारी की EPS यानी पेंशन स्कीम में जमा होता है।
लंबे समय तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि 20 साल की नौकरी पूरी करने के बाद रिटायरमेंट पर कितनी मासिक पेंशन मिल सकती है? आइए EPS के नियम और पेंशन कैलकुलेशन को आसान भाषा में समझते हैं।
20 साल की नौकरी पर 2 साल का अतिरिक्त फायदा क्या है?
EPS 1995 के तहत पेंशन पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी करनी होती है। इसके अलावा, 20 साल या उससे अधिक की पेंशन योग्य सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को सेवा अवधि में 2 साल का अतिरिक्त वेटेज मिलने का प्रावधान है।
यानी अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा 20 साल है, तो पेंशन की गणना के लिए इसे 22 साल माना जा सकता है।
EPS पेंशन की गणना कैसे होती है?
EPFO के तहत मासिक पेंशन निकालने का सामान्य फॉर्मूला इस प्रकार है:
मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70
यहां दो चीजें सबसे महत्वपूर्ण हैं:
- पेंशन योग्य वेतन: आम तौर पर अंतिम 60 महीनों के औसत पेंशन योग्य वेतन के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
- पेंशन योग्य सेवा: EPS के तहत योगदान वाली सेवा अवधि को माना जाता है।
20 साल नौकरी करने पर कितनी पेंशन बनेगी?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹15,000 प्रति माह है और उसने 20 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी की है।
इस स्थिति में:
- पेंशन योग्य सेवा: 20 साल
- अतिरिक्त वेटेज: 2 साल
- कुल पेंशन योग्य सेवा: 22 साल
- पेंशन योग्य वेतन: ₹15,000
अब EPS का फॉर्मूला लागू करते हैं:
पेंशन = (₹15,000 × 22) ÷ 70
पेंशन = ₹3,30,000 ÷ 70
पेंशन = लगभग ₹4,714 प्रति माह
इस उदाहरण के अनुसार, 20 साल की पेंशन योग्य सेवा और ₹15,000 की पेंशन योग्य सैलरी मानने पर कर्मचारी को 58 साल की उम्र में पेंशन शुरू होने पर लगभग ₹4,714 मासिक पेंशन मिल सकती है।
ध्यान रखें
यह एक उदाहरण के आधार पर की गई गणना है। वास्तविक EPS पेंशन कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा, पेंशन योग्य वेतन और लागू EPFO नियमों के आधार पर तय होती है। इसलिए हर कर्मचारी की अंतिम पेंशन राशि अलग हो सकती है।