देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब राहत की उम्मीद दिखाई दे रही है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर कई बड़ी वित्तीय संस्थाओं ने सकारात्मक अनुमान जारी किए हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार नीचे आती हैं, तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो सकते हैं।
सिटीग्रुप (Citigroup) ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि वर्ष 2026 के अंत तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इससे भारतीय तेल कंपनियों की लागत घटेगी और आम लोगों को ईंधन की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
सिटीग्रुप ने क्यों जताई कीमतों में गिरावट की उम्मीद?
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इस वजह से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी।
हालांकि अब दोनों देशों के बीच अस्थायी सहमति बनने के बाद इस समुद्री मार्ग पर तेल परिवहन फिर से सामान्य हो गया है। सप्लाई में सुधार होने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ गई है, जिसका असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
ब्रेंट क्रूड में लगभग 30% की गिरावट
विश्लेषकों के अनुसार, दूसरी तिमाही के दौरान ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। फिलहाल इसकी कीमत लगभग 71.92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाजार में सप्लाई इसी तरह बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में कीमतें और नीचे जा सकती हैं।
चीन की कम मांग भी बनी बड़ी वजह
सिटीग्रुप के विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक चीन इस समय सीमित खरीदारी कर रहा है। इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग अपेक्षा से कम बनी हुई है।
इसके अलावा, दुनिया भर में तेल का स्टॉक भी अनुमान से अधिक है। यानी बाजार में पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल उपलब्ध है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
साल के अंत तक 60-65 डॉलर तक पहुंच सकता है ब्रेंट क्रूड
रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्मियों के दौरान कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, लेकिन यह अस्थायी होगी। इसके बाद बाजार फिर से संतुलित होने की संभावना है।
सिटीग्रुप का अनुमान है कि वर्ष के अंत तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ सकता है।
अन्य वैश्विक संस्थाओं ने भी जताया यही अनुमान
केवल सिटीग्रुप ही नहीं, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख निवेश और वित्तीय संस्थाएं भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना जता चुकी हैं।
- गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि ईरान से जुड़े तनाव कम होने के बाद वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों में नरमी आएगी।
- मॉर्गन स्टेनली ने भी हाल के दिनों में अपने क्रूड ऑयल प्राइस अनुमान को दो बार नीचे संशोधित किया है।
इन रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रह सकता है।
भारत पर क्या होगा इसका असर?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी तेल कंपनियों को मिल सकता है।
यदि ब्रेंट क्रूड वास्तव में 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचता है, तो इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियों की खरीद लागत कम होगी। इससे उनके मुनाफे में सुधार होगा और सरकार तथा तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती पर विचार कर सकती हैं।
क्या पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी कटौती की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे बनी रहती हैं और अन्य आर्थिक परिस्थितियां भी अनुकूल रहती हैं, तो आने वाले समय में देश के उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।
निष्कर्ष: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट भारत के लिए अच्छी खबर हो सकती है। यदि प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकार की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।