अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गड़बड़ी मामले की जांच पुलिस और एसआईटी द्वारा जारी है। इस बीच मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आठ आरोपियों की गिरफ्तारी और लगातार सामने आ रहे खुलासों के बीच अब पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायण के गंभीर आरोप चर्चा का विषय बन गए हैं।
उन्होंने दावा किया है कि उनके परिवार ने श्रद्धा भाव से लगभग 151 किलोग्राम वजन की श्रीरामचरितमानस राम मंदिर को भेंट की थी, जिसमें करीब 800 ग्राम सोने का उपयोग किया गया था। उनका कहना है कि कुछ महीनों बाद यह धार्मिक ग्रंथ मंदिर परिसर से गायब हो गया।
चंपत राय पर लगाए अनदेखी के आरोप
एस. लक्ष्मीनारायण का कहना है कि इस मामले को लेकर उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से कई बार संपर्क किया। उन्होंने पत्र लिखे और व्यक्तिगत रूप से भी मुलाकात की, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
इस पूरे विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यदि चंदे में गड़बड़ी हुई है तो यह बेहद गंभीर और पापपूर्ण कृत्य है।
परिवार की आस्था से जुड़ी थी विशेष भेंट
पूर्व गृह सचिव ने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से भगवान श्रीराम का उपासक रहा है। उनके अनुसार, उनके घर में लगभग 1500 वर्ष पुरानी रामायण आज भी सुरक्षित है, जिसकी पीढ़ियों से पूजा होती आ रही है। उनकी माता जीवनभर “राम-राम” लिखती रहीं और इसी आस्था के कारण परिवार ने राम मंदिर के लिए एक विशेष श्रीरामचरितमानस तैयार कराने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि यह विशेष ग्रंथ 8 अप्रैल 2024, राम नवमी के अवसर पर मंदिर प्रशासन की सहायता से राम मंदिर में भेंट किया गया था।
रिश्तेदारों ने दी गायब होने की जानकारी
एस. लक्ष्मीनारायण के मुताबिक, भेंट देने के लगभग तीन से चार महीने बाद उनके रिश्तेदार दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे। वहीं से उन्हें सूचना मिली कि मंदिर में रखी गई श्रीरामचरितमानस अब वहां दिखाई नहीं दे रही है। इसके बाद उन्होंने स्वयं अयोध्या जाकर इसकी जानकारी लेने का प्रयास किया।
मां के गहनों से तैयार कराया गया था सोने का कार्य
पूर्व गृह सचिव ने बताया कि इस विशेष श्रीरामचरितमानस पर करीब 800 ग्राम सोने की कलाकारी कराई गई थी। इसके लिए उनकी दिवंगत मां के आभूषणों को गलवाकर इस्तेमाल किया गया था। उनका कहना है कि यह उनके परिवार की जीवनभर की सबसे मूल्यवान धार्मिक भेंट थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने चंपत राय से मुलाकात की तो उन्हें बताया गया कि मंदिर में बड़ी संख्या में ऐसी भेंटें आती हैं और सभी को प्रदर्शित करना संभव नहीं है। हालांकि, पहले उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि इस ग्रंथ को रामलला के निकट रखा जाएगा, लेकिन बाद में यह आश्वासन पूरा नहीं हुआ।
नृपेंद्र मिश्र से भी की थी शिकायत
एस. लक्ष्मीनारायण ने बताया कि उन्होंने इस विषय में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र से भी संपर्क किया था। मिश्र ने उनसे कहा कि अंतिम निर्णय चंपत राय के स्तर पर ही लिया जा सकता है।
पूर्व गृह सचिव का दावा है कि उन्होंने लगभग 50 व्हाट्सएप संदेश और 10 से 12 पत्र लिखकर लगातार अनुरोध किया कि उनकी भेंट को मंदिर में उचित स्थान दिया जाए। इसके बावजूद उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें उनकी भेंट की कोई आधिकारिक रसीद तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
कौन हैं एस. लक्ष्मीनारायण?
एस. लक्ष्मीनारायण मूल रूप से चेन्नई के निवासी हैं और 1970 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वे भारत सरकार में केंद्रीय गृह सचिव का महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे दिल्ली में निवास करते हैं। उनकी पत्नी सरस्वती गृहिणी हैं, जबकि उनकी बेटी प्रियदर्शिनी अमेरिका में रहती हैं।
प्रशासनिक सेवा के दौरान वे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के करीबी अधिकारियों में गिने जाते थे। उन्हें भारत गौरव अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। फिलहाल राम मंदिर में भेंट की गई श्रीरामचरितमानस को लेकर किए गए उनके दावों के कारण वे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।