खाने-पीने की चीजें खरीदते समय ज्यादातर लोग पैकेट पर लिखी जानकारी और ब्रांड की क्वालिटी पर भरोसा करते हैं। लेकिन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की जांच में दो कंपनियों के उत्पादों में नियमों का उल्लंघन सामने आया है। जांच के बाद कर्नाटक की Dharwad Mishra Pedha and Food Processing Industry और गुजरात के कच्छ की Shree Chemfood Pvt. Ltd. के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
FSSAI की जांच में एक कंपनी के मोतीचूर लड्डू में निर्धारित सीमा से ज्यादा फूड कलर पाया गया, जबकि दूसरी कंपनी के आयोडीनयुक्त नमक में क्वालिटी से जुड़ी कई कमियां और लेबलिंग संबंधी गड़बड़ी सामने आई। इन मामलों में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत जुर्माना लगाया गया है।
मोतीचूर लड्डू में तय सीमा से ज्यादा मिला Tartrazine
कर्नाटक स्थित Dharwad Mishra Pedha and Food Processing Industry के मोतीचूर लड्डू को लेकर FSSAI ने कार्रवाई की। जांच के लिए लिए गए सैंपल की लैब टेस्टिंग में Tartrazine नामक फूड कलर की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, लड्डू के सैंपल में Tartrazine की मात्रा 267.05 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाई गई, जबकि इसकी अनुमत सीमा 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है। यानी उत्पाद में इस आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल तय सीमा से अधिक किया गया था। इसी वजह से सैंपल को निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं माना गया।
क्या है Tartrazine और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?
Tartrazine एक कृत्रिम खाद्य रंग है, जिसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को पीला या नारंगी रंग देने के लिए किया जाता है। खाद्य उत्पादों में ऐसे रंगों का इस्तेमाल निर्धारित नियमों और तय मात्रा के भीतर ही किया जा सकता है।
जब किसी उत्पाद में इसकी मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है, तो वह खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माना जा सकता है। मोतीचूर लड्डू के मामले में भी यही वजह कार्रवाई का आधार बनी।
आयोडीनयुक्त नमक में भी सामने आईं कई कमियां
दूसरा मामला गुजरात के कच्छ में स्थित Shree Chemfood Pvt. Ltd. से जुड़ा है। कंपनी के आयोडीनयुक्त नमक के सैंपल की जांच में उत्पाद गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा।
FSSAI की जांच के दौरान नमक में केवल क्वालिटी से जुड़ी समस्या ही नहीं मिली, बल्कि पैकेट पर दी गई जानकारी में भी नियमों का उल्लंघन सामने आया। इस वजह से उत्पाद को भ्रामक लेबलिंग से जुड़ा मामला भी माना गया।
नमक की जांच में क्या-क्या गड़बड़ी मिली?
लैब टेस्ट और सैंपलिंग के दौरान आयोडीनयुक्त नमक में कई कमियां सामने आईं। इनमें प्रमुख रूप से:
- नमक में आयोडीन की मात्रा निर्धारित स्तर के अनुरूप नहीं थी।
- सोडियम क्लोराइड का स्तर तय खाद्य मानकों पर खरा नहीं उतरा।
- अघुलनशील पदार्थ से संबंधित समस्या भी पाई गई।
- पैकेट पर दी गई लेबलिंग में भी नियमों का उल्लंघन मिला।
- लेबल पर मौजूद जानकारी को भ्रामक माना गया।
इन कमियों के आधार पर कंपनी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।
FSSAI ने दोनों कंपनियों पर क्यों की कार्रवाई?
FSSAI और राज्य की खाद्य सुरक्षा एजेंसियां बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पादों के सैंपल समय-समय पर जांच के लिए लेती हैं। इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की जाती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उत्पाद तय गुणवत्ता, सुरक्षा और लेबलिंग नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
यदि किसी खाद्य पदार्थ में निर्धारित मानकों से जुड़ी कमी, गलत लेबलिंग या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित निर्माता या कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इन दोनों मामलों में भी जांच के बाद नियमों के उल्लंघन के आधार पर जुर्माना लगाया गया।
ग्राहकों को खरीदारी के समय क्या ध्यान रखना चाहिए?
FSSAI की यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। पैकेज्ड फूड, नमक, मिठाई या अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय सिर्फ ब्रांड के नाम पर निर्भर रहने के बजाय पैकेट पर दी गई जरूरी जानकारी भी देखनी चाहिए।
खरीदारी से पहले FSSAI लाइसेंस नंबर, निर्माण और एक्सपायरी की तारीख, सामग्री की सूची, लेबलिंग और पैकेजिंग जैसी जानकारी जरूर जांचें। मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर भी सतर्क रहना जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य उत्पाद तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों। इसलिए उपभोक्ताओं की जागरूकता के साथ-साथ नियमित जांच और नियामकीय कार्रवाई भी बेहद महत्वपूर्ण है।