डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए केवल मीठी चीजों से दूरी बनाना ही काफी नहीं है। आप कितना खाते हैं, कितनी जल्दी खाते हैं और किस समय खाते हैं, इन बातों का भी ब्लड शुगर पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर जरूरत से ज्यादा खाना और बिना ध्यान दिए भोजन करना डायबिटीज मैनेजमेंट को मुश्किल बना सकता है।
डायबिटीज में ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ा रहने पर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर आंखों, किडनी, हृदय, नसों और त्वचा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में रोजमर्रा की खान-पान की आदतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।
ओवरईटिंग क्यों हो सकती है नुकसानदायक?
मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग के सीनियर डायरेक्टर-डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक डिजीज डॉ. आलोक जोशी के अनुसार, एक बार में जरूरत से ज्यादा भोजन करने पर शरीर के लिए अचानक बढ़े ग्लूकोज को संभालना मुश्किल हो सकता है। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है।
कई लोगों को लगता है कि अगर भोजन हेल्दी है तो उसे ज्यादा मात्रा में खाने से कोई खास नुकसान नहीं होगा। लेकिन डायबिटीज में यह सोच सही नहीं है। भोजन पौष्टिक होने के बावजूद उसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा होने पर ब्लड ग्लूकोज प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्लेट में क्या है, इसके साथ-साथ कितना है, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।
जल्दी-जल्दी खाना भी बदल सकता है आपकी आदत
डायबिटीज में सिर्फ भोजन की मात्रा ही नहीं, खाने की रफ्तार भी मायने रखती है। बहुत तेजी से भोजन करने पर दिमाग को पेट भरने का संकेत मिलने में समय लग सकता है। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति जरूरत से अधिक खा लेता है।
जल्दबाजी में खाने से भोजन को अच्छी तरह चबाने पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं रहता। इसलिए कोशिश करें कि भोजन आराम से करें, हर निवाले को अच्छी तरह चबाएं और खाने के दौरान अपना ध्यान भोजन पर रखें।
तनाव में ज्यादा खाना क्यों है समस्या?
कुछ लोग तनाव, गुस्सा, उदासी या अकेलेपन जैसी भावनाओं के दौरान जरूरत से ज्यादा खाने लगते हैं। इसे इमोशनल ईटिंग कहा जाता है। डायबिटीज वाले लोगों के लिए यह आदत परेशानी बढ़ा सकती है।
तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिसका ब्लड ग्लूकोज पर असर पड़ सकता है। ऐसे समय में बिना भूख के ज्यादा खाने से स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए भावनात्मक तनाव में भोजन को सहारे के तौर पर इस्तेमाल करने के बजाय अपनी भावनाओं को पहचानना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्वस्थ तरीके अपनाना बेहतर है।
डायबिटीज में अपनाएं माइंडफुल ईटिंग
डायबिटीज मैनेजमेंट में माइंडफुल ईटिंग मददगार आदत हो सकती है। इसका मतलब है कि भोजन करते समय इस बात पर ध्यान दिया जाए कि आप क्या खा रहे हैं, कितनी मात्रा में खा रहे हैं और वास्तव में आपको कितनी भूख है।
भोजन को धीरे-धीरे खाने, पोर्शन का ध्यान रखने और बिना जरूरत बार-बार खाने से बचने जैसी आदतें ओवरईटिंग को कम करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, डायबिटीज की दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना बंद नहीं करनी चाहिए।
खाने का समय रखें नियमित
डायबिटीज में भोजन का समय भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बहुत लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक ज्यादा खाना ओवरईटिंग की संभावना बढ़ा सकता है।
इसलिए अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार एक नियमित मील शेड्यूल बनाना बेहतर है। भोजन के बीच कितना अंतर होना चाहिए और स्नैक्स की जरूरत है या नहीं, यह हर व्यक्ति की दवा, दिनचर्या और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचें।
- खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं।
- भोजन करते समय मोबाइल या दूसरी चीजों से ध्यान भटकाने से बचें।
- खाने की मात्रा यानी पोर्शन पर नजर रखें।
- तनाव या भावनाओं के कारण बार-बार खाने की आदत को पहचानें।
- लंबे समय तक भूखे रहने के बाद बहुत ज्यादा खाने से बचें।
- भोजन का समय और डाइट डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के मुताबिक रखें।
- ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करें और दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।
निष्कर्ष
डायबिटीज को मैनेज करने में सिर्फ चीनी या मिठाइयों से परहेज करना पर्याप्त नहीं है। ओवरईटिंग, जल्दी खाना और तनाव में जरूरत से ज्यादा खाना जैसी आदतों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी है। संतुलित भोजन, सही पोर्शन, नियमित खान-पान और माइंडफुल ईटिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर ब्लड शुगर मैनेजमेंट को बेहतर किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी डॉक्टर की सलाह, दवा या इलाज का विकल्प नहीं है। डायबिटीज की दवा, डाइट या भोजन के समय में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।