सफेद और चमकदार दांत मुस्कान को आकर्षक बनाने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। यही वजह है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर दांतों का पीलापन जल्दी दूर करने के कई घरेलू नुस्खे वायरल होते रहते हैं। इनमें बेकिंग सोडा, नींबू, सिरका और हल्दी जैसी चीजों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कुछ दावे तो ऐसे भी होते हैं, जिनमें कुछ ही मिनटों में दांत सफेद करने की बात कही जाती है।
हालांकि, दांतों का प्राकृतिक रंग केवल सतह पर मौजूद दागों की वजह से तय नहीं होता। कई बार इनेमल के पतले होने के कारण उसके नीचे मौजूद डेंटिन अधिक दिखाई देने लगता है, जिससे दांत पीले नजर आ सकते हैं। इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि दांतों का रंग बदलने की असली वजह क्या है और इस्तेमाल की जाने वाली चीज दांतों के लिए कितनी सुरक्षित है।
दांत पीले होने की वजह सिर्फ दाग नहीं
चाय, कॉफी, तंबाकू और कुछ रंगीन पेय पदार्थों के नियमित सेवन से दांतों की बाहरी सतह पर दाग जमा हो सकते हैं। अगर ओरल हाइजीन का पर्याप्त ध्यान न रखा जाए, तो ये दाग समय के साथ अधिक गहरे नजर आने लगते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ भी दांतों के रंग में प्राकृतिक बदलाव आ सकता है। दांत की सबसे बाहरी परत को इनेमल कहा जाता है। समय के साथ इसके पतले होने पर नीचे मौजूद डेंटिन अधिक दिखाई देता है। डेंटिन का रंग स्वाभाविक रूप से हल्का पीला होता है। ऐसे में केवल सतह के दाग हटाने से दांतों का प्राकृतिक रंग पूरी तरह सफेद नहीं हो जाता।
क्या बेकिंग सोडा दांत सफेद कर सकता है?
बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कुछ टूथपेस्ट में भी किया जाता है और यह दांतों की सतह पर मौजूद हल्के दागों को हटाने में मदद कर सकता है। लेकिन इससे दांतों का प्राकृतिक रंग बदलने की उम्मीद करना सही नहीं है।
सबसे बड़ी समस्या तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति बेकिंग सोडा को सीधे दांतों पर बार-बार या बहुत जोर से रगड़ता है। अत्यधिक रगड़ने से इनेमल पर नुकसान पड़ सकता है और दांतों में ठंडा-गरम लगने जैसी संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसलिए बेकिंग सोडा को दांतों को तुरंत सफेद करने वाला चमत्कारी उपाय मानना ठीक नहीं है।
नींबू और सिरका क्यों हो सकते हैं नुकसानदायक?
दांत सफेद करने के लिए नींबू या सिरके का इस्तेमाल करने की सलाह भी अक्सर सोशल मीडिया पर दिखाई देती है। लेकिन दोनों ही अम्लीय होते हैं और बार-बार दांतों के संपर्क में आने पर इनेमल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अगर इनेमल कमजोर होता है, तो दांतों में संवेदनशीलता बढ़ सकती है और उनके नीचे मौजूद पीले रंग का डेंटिन अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है। यानी दांत सफेद करने की कोशिश उल्टा उन्हें और पीला दिखा सकती है। खास बात यह है कि एक बार इनेमल को नुकसान पहुंचने के बाद शरीर उसे पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं बना सकता।
दांतों को सुरक्षित तरीके से सफेद कैसे करें?
दांतों की व्हाइटनिंग के लिए ऐसे वैज्ञानिक तरीके मौजूद हैं, जिनमें पेरोक्साइड जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। ये दांतों का रंग प्रभावित करने वाले कुछ रंगीन अणुओं पर काम करके उन्हें छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करते हैं।
बाजार में उपलब्ध व्हाइटनिंग स्ट्रिप्स और जैल भी इसी तरह के सिद्धांत पर काम कर सकते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल निर्देशों के अनुसार करना जरूरी है। सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक डेंटिस्ट की सलाह लेना है। दांतों की स्थिति और पीलापन किस वजह से है, इसे देखकर डेंटिस्ट उपयुक्त व्हाइटनिंग तरीका सुझा सकते हैं।
निष्कर्ष
दांतों का पीलापन हमेशा केवल सतह पर जमा दागों की वजह से नहीं होता। इनेमल का पतला होना और उसके नीचे मौजूद डेंटिन का अधिक दिखाई देना भी इसका कारण हो सकता है। बेकिंग सोडा कुछ सतही दाग कम कर सकता है, लेकिन यह दांतों का प्राकृतिक रंग नहीं बदलता। वहीं नींबू और सिरके जैसे अम्लीय पदार्थों का बार-बार इस्तेमाल इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल घरेलू नुस्खों को आंख बंद करके अपनाने के बजाय दांतों की सही वजह समझना और सुरक्षित, वैज्ञानिक व्हाइटनिंग तरीकों को प्राथमिकता देना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डेंटिस्ट से सलाह लेना दांतों की सेहत और बेहतर परिणाम, दोनों के लिए सबसे सही कदम है।