इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में हुए सैन्य टकराव को लेकर पाकिस्तान की वायुसेना से जुड़ा एक बड़ा दावा सामने आया है। पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) के एक रिटायर्ड एयर मार्शल के अनुसार, संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना ने अपने F-16 लड़ाकू विमानों को भारतीय राफेल विमानों से काफी दूरी पर रखा था। उनका कहना था कि F-16 के पास मौजूद हथियार भारतीय राफेल की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता का प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
F-16 को पीछे रखने की क्या थी वजह?
पाकिस्तान के F-16 विमानों में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख एयर-टू-एयर मिसाइल AIM-120C-5 AMRAAM है। इसकी अधिकतम रेंज करीब 100 किलोमीटर के आसपास बताई जाती है। हालांकि किसी मिसाइल की वास्तविक प्रभावी दूरी केवल उसके आधिकारिक रेंज आंकड़े से तय नहीं होती। लॉन्च की ऊंचाई, विमान की गति, लक्ष्य की दिशा और गति, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तथा अन्य परिस्थितियां इसके प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं।
इसी वजह से पाकिस्तानी रिटायर्ड एयर मार्शल के दावे के मुताबिक, 2025 के संघर्ष में F-16 को राफेल से सीधी लंबी दूरी की भिड़ंत से दूर रखने की रणनीति अपनाई गई।
क्या F-16 अब पुराना पड़ चुका है?
पाकिस्तान ने अमेरिका से F-16 लड़ाकू विमान हासिल करने की शुरुआत 1980 के दशक में की थी। शुरुआती दौर में इन विमानों ने पाकिस्तान की वायु क्षमता को काफी मजबूत किया। बाद में F-16 बेड़े में कई तकनीकी सुधार किए गए।
2000 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान को AIM-120C मिसाइलें मिलने के बाद F-16 की Beyond Visual Range यानी BVR लड़ाई की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई। इससे पाकिस्तानी F-16 भारतीय वायुसेना के Su-30MKI जैसे विमानों के सामने पहले की तुलना में अधिक सक्षम हो गए।
हालांकि Su-30MKI में अधिक शक्तिशाली सेंसर और रडार क्षमताएं मौजूद हैं। यह विमान भारी हथियारों और लंबी दूरी के हथियारों को लेकर भी ऑपरेशन कर सकता है। यही वजह है कि दोनों विमानों की तुलना केवल एक मिसाइल की रेंज के आधार पर करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
अमेरिका पाकिस्तान के F-16 को दे रहा है नया अपग्रेड?
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के F-16 बेड़े के लिए करीब 686 मिलियन डॉलर के अपग्रेड और एडवांस टेक्नोलॉजी पैकेज को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य पुराने विमानों की तकनीकी कमियों को दूर करना और उनकी ऑपरेशनल क्षमता को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाना है।
इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से निपटने की क्षमता
पैकेज में F-16 के AN/APG-66 और AN/APG-68 रडार सिस्टम से जुड़े सॉफ्टवेयर अपग्रेड शामिल हैं। इन सुधारों का उद्देश्य विमानों को इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसे खतरों से निपटने में बेहतर बनाना है।
Link-16 से बेहतर डेटा शेयरिंग
पाकिस्तान को 92 Link-16 टैक्टिकल डेटा लिंक सिस्टम मिलने की भी बात कही गई है। इस तकनीक की मदद से F-16 पायलट दूसरे एयरक्राफ्ट और संबंधित सैन्य यूनिट्स के साथ तेजी से सामरिक जानकारी साझा कर सकते हैं।
इस तरह की नेटवर्किंग आधुनिक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि पायलट को अकेले अपने रडार पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक युद्धक्षेत्र की जानकारी मिल सकती है।
IFF सिस्टम से विमान की पहचान
अपग्रेड पैकेज में AN/APX-126 क्रिप्टोग्राफिक मॉड्यूल और Identification Friend or Foe (IFF) से जुड़ी प्रणालियां भी शामिल हैं। इनका काम युद्ध के दौरान मित्र और दुश्मन के विमानों की पहचान को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाना है।
Network-Centric Warfare से बढ़ेगी क्षमता
Link-16 जैसी प्रणाली F-16 को नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली का हिस्सा बनाने में मदद कर सकती है। इसके जरिए अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म के बीच वास्तविक समय में सामरिक जानकारी साझा की जा सकती है।
इसका फायदा यह होगा कि पायलट को आसपास मौजूद दूसरे विमानों, नौसैनिक प्लेटफॉर्म या जमीनी सैन्य इकाइयों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
फिर भी F-16 को नहीं मिली सबसे आधुनिक AESA रडार तकनीक
अपग्रेड के बावजूद एक महत्वपूर्ण सीमा बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान को अमेरिकी F-16 के लिए AN/APG-83 SABR AESA रडार नहीं दिया गया है। इसके बजाय मौजूदा रडार सिस्टम से जुड़े सॉफ्टवेयर और अन्य क्षमताओं को अपग्रेड करने पर जोर दिया गया है।
इसका मतलब है कि अपग्रेड के बाद पाकिस्तानी F-16 पहले की तुलना में अधिक सक्षम हो सकते हैं, लेकिन इससे वे अपने आप आधुनिकतम लड़ाकू विमानों के बराबर नहीं हो जाते।
अगली लड़ाई में कितना बदल सकता है F-16 का प्रदर्शन?
2025 के संघर्ष से जुड़े दावों के बाद पाकिस्तान के F-16 बेड़े की क्षमता को लेकर चर्चा तेज हुई है। प्रस्तावित अपग्रेड से उसकी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, डेटा शेयरिंग, संचार और पहचान क्षमता बेहतर हो सकती है।
हालांकि किसी हवाई युद्ध का परिणाम केवल विमान या मिसाइल की अधिकतम रेंज से तय नहीं होता। पायलट की ट्रेनिंग, रडार और सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नेटवर्किंग, AWACS जैसी सपोर्ट प्रणालियां और युद्ध की रणनीति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं।
इसलिए अपग्रेड के बाद F-16 निश्चित रूप से अधिक सक्षम प्लेटफॉर्म बन सकता है, लेकिन उसकी वास्तविक क्षमता का आकलन केवल राफेल के मुकाबले एक हथियार की रेंज देखकर करना सही नहीं होगा।