किडनी खराब होने के संकेत: कौन-सा लक्षण दिखते ही कराएं जांच? डॉक्टर से जानें

Saroj kanwar
19 Min Read

किडनी शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है। इसका मुख्य काम खून को फिल्टर करके शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालना है। इसके अलावा किडनी शरीर में सोडियम, मिनरल्स और ब्लड प्रेशर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।

Contents
किडनी खराब होने पर सबसे पहले कौन-सा लक्षण दिख सकता है?किडनी की समस्या में दिख सकते हैं ये लक्षणपेशाब में होने वाले बदलावों पर दें खास ध्यानकिडनी की समस्या में शरीर पर क्यों आती है सूजन?किन लोगों में किडनी की बीमारी का जोखिम ज्यादा रहता है?कब करवानी चाहिए किडनी की जांच?1. यूरिन टेस्ट2. ब्लड टेस्ट3. eGFR टेस्ट4. अल्ट्रासाउंडकिडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?क्या समय पर इलाज से किडनी को बचाया जा सकता है?निष्कर्षकिडनी खराब होने पर सबसे पहले कौन-सा लक्षण दिख सकता है?किडनी की समस्या में दिख सकते हैं ये लक्षणपेशाब में होने वाले बदलावों पर दें खास ध्यानकिडनी की समस्या में शरीर पर क्यों आती है सूजन?किन लोगों में किडनी की बीमारी का जोखिम ज्यादा रहता है?कब करवानी चाहिए किडनी की जांच?1. यूरिन टेस्ट2. ब्लड टेस्ट3. eGFR टेस्ट4. अल्ट्रासाउंडकिडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?क्या समय पर इलाज से किडनी को बचाया जा सकता है?निष्कर्ष

बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पर्याप्त पानी न पीने जैसी आदतों का असर किडनी की सेहत पर पड़ सकता है। चिंता की बात यह है कि किडनी से जुड़ी कई समस्याएं शुरुआती दौर में बहुत सामान्य लक्षणों के साथ सामने आती हैं। ऐसे में लोग इन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

डॉ. सुमोल रत्ना, सहायक प्रोफेसर, चिकित्सा विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के अनुसार, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में कुछ शुरुआती संकेत दिखाई दे सकते हैं। आइए जानते हैं इन्हें कैसे पहचानें।

किडनी खराब होने पर सबसे पहले कौन-सा लक्षण दिख सकता है?

किडनी की समस्या का शुरुआती और सामान्य संकेत लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना हो सकता है। जब किडनी पर्याप्त रूप से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में कुछ विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसके कारण व्यक्ति को सुस्ती, कमजोरी और सामान्य से ज्यादा थकावट महसूस हो सकती है।

हालांकि, केवल थकान को किडनी की बीमारी का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए अगर थकान लगातार बनी रहती है और इसके साथ दूसरे लक्षण भी नजर आते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

किडनी की समस्या में दिख सकते हैं ये लक्षण

  • पैरों और टखनों में सूजन
  • चेहरे या आंखों के आसपास सूजन
  • पेशाब के पैटर्न में बदलाव
  • भूख कम होना
  • मतली या उल्टी
  • त्वचा में खुजली
  • सांस लेने में परेशानी
  • रात में बार-बार पेशाब आना
  • लगातार कमजोरी या सुस्ती

हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है। कई बार किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी आगे बढ़ सकती है।

पेशाब में होने वाले बदलावों पर दें खास ध्यान

किडनी की सेहत का आकलन करने में पेशाब से जुड़े बदलाव महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। अगर पेशाब में लंबे समय तक असामान्य बदलाव नजर आ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

इन बदलावों पर विशेष ध्यान दें:

  • पेशाब का रंग सामान्य से अधिक गहरा होना
  • पेशाब में बार-बार झाग दिखाई देना
  • पेशाब में खून आना
  • पेशाब की मात्रा कम या ज्यादा होना
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द
  • रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना

इनमें से कुछ लक्षण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या अन्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

किडनी की समस्या में शरीर पर क्यों आती है सूजन?

स्वस्थ किडनी शरीर में मौजूद अतिरिक्त पानी और नमक को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इसका असर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है।

शुरुआत में पैरों और टखनों में सूजन देखी जा सकती है। कुछ मामलों में चेहरे या आंखों के आसपास भी सूजन नजर आती है। अगर सुबह उठने के बाद आंखों के आसपास लगातार सूजन रहती है, तो इसे केवल थकान मानकर छोड़ना उचित नहीं है।

किन लोगों में किडनी की बीमारी का जोखिम ज्यादा रहता है?

कुछ स्थितियां किडनी को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ा सकती हैं। खासतौर पर इन लोगों को अपनी किडनी की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए:

  • डायबिटीज से पीड़ित लोग
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति
  • मोटापे की समस्या वाले लोग
  • धूम्रपान करने वाले लोग
  • अधिक शराब का सेवन करने वाले लोग
  • परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रखने वाले लोग
  • लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोग
  • बुजुर्ग व्यक्ति

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को प्रभावित करने वाले प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इन स्थितियों को नियंत्रित रखना किडनी की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

कब करवानी चाहिए किडनी की जांच?

अगर थकान, सूजन या पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। खासकर निम्न परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है:

  • शरीर में लगातार सूजन रहना
  • पेशाब के पैटर्न में बदलाव
  • बिना स्पष्ट कारण लगातार थकान होना
  • ब्लड प्रेशर का बार-बार बढ़ना
  • बार-बार यूरिन इंफेक्शन होना
  • डायबिटीज के साथ कमजोरी या अन्य नए लक्षण बढ़ना

डॉक्टर स्थिति के अनुसार अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं।

1. यूरिन टेस्ट

इस जांच से पेशाब में प्रोटीन, खून या अन्य असामान्य चीजों की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलती है।

2. ब्लड टेस्ट

ब्लड टेस्ट के जरिए क्रिएटिनिन और अन्य संबंधित पैरामीटर की जांच की जाती है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता का आकलन किया जा सकता है।

3. eGFR टेस्ट

eGFR यानी estimated Glomerular Filtration Rate किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान लगाने में मदद करता है।

4. अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड से किडनी की संरचना, आकार और कुछ अन्य संभावित असामान्यताओं की जानकारी मिल सकती है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ सामान्य उपाय मददगार हो सकते हैं:

पर्याप्त पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। हालांकि, जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

नमक का सेवन सीमित रखें: ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और लंबे समय में इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है।

ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें: डायबिटीज और हाई बीपी को कंट्रोल में रखना किडनी की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

बिना सलाह दवाएं न लें: कुछ दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। किसी भी दवा का नियमित सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।

धूम्रपान और शराब से बचें: ये आदतें लंबे समय में शरीर के कई अंगों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं: खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी के जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करवानी चाहिए।

क्या समय पर इलाज से किडनी को बचाया जा सकता है?

कई मामलों में बीमारी की जल्दी पहचान होने पर उसके कारण और स्थिति के अनुसार उपचार से किडनी को होने वाले नुकसान को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, खानपान और दवाओं से जुड़ी सावधानियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वहीं, किडनी की गंभीर बीमारी का लंबे समय तक इलाज न होने पर स्थिति बिगड़ सकती है और कुछ मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट जैसी उपचार पद्धतियों की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए शुरुआती संकेतों को समझना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

किडनी की बीमारी कई बार धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआत में इसके लक्षण बेहद सामान्य दिखाई दे सकते हैं। लगातार थकान और कमजोरी, पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में बदलाव और रात में बार-बार पेशाब आना ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए।

खासकर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों को किडनी की नियमित जांच के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। याद रखें, इन लक्षणों का मतलब हमेशा किडनी की बीमारी होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने वाले या नए लक्षणों की सही वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।किडनी शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है। इसका मुख्य काम खून को फिल्टर करके शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालना है। इसके अलावा किडनी शरीर में सोडियम, मिनरल्स और ब्लड प्रेशर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।

बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पर्याप्त पानी न पीने जैसी आदतों का असर किडनी की सेहत पर पड़ सकता है। चिंता की बात यह है कि किडनी से जुड़ी कई समस्याएं शुरुआती दौर में बहुत सामान्य लक्षणों के साथ सामने आती हैं। ऐसे में लोग इन्हें अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

डॉ. सुमोल रत्ना, सहायक प्रोफेसर, चिकित्सा विभाग, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के अनुसार, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में कुछ शुरुआती संकेत दिखाई दे सकते हैं। आइए जानते हैं इन्हें कैसे पहचानें।

किडनी खराब होने पर सबसे पहले कौन-सा लक्षण दिख सकता है?

किडनी की समस्या का शुरुआती और सामान्य संकेत लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना हो सकता है। जब किडनी पर्याप्त रूप से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में कुछ विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसके कारण व्यक्ति को सुस्ती, कमजोरी और सामान्य से ज्यादा थकावट महसूस हो सकती है।

हालांकि, केवल थकान को किडनी की बीमारी का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए अगर थकान लगातार बनी रहती है और इसके साथ दूसरे लक्षण भी नजर आते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

किडनी की समस्या में दिख सकते हैं ये लक्षण

  • पैरों और टखनों में सूजन
  • चेहरे या आंखों के आसपास सूजन
  • पेशाब के पैटर्न में बदलाव
  • भूख कम होना
  • मतली या उल्टी
  • त्वचा में खुजली
  • सांस लेने में परेशानी
  • रात में बार-बार पेशाब आना
  • लगातार कमजोरी या सुस्ती

हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है। कई बार किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी आगे बढ़ सकती है।

पेशाब में होने वाले बदलावों पर दें खास ध्यान

किडनी की सेहत का आकलन करने में पेशाब से जुड़े बदलाव महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। अगर पेशाब में लंबे समय तक असामान्य बदलाव नजर आ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

इन बदलावों पर विशेष ध्यान दें:

  • पेशाब का रंग सामान्य से अधिक गहरा होना
  • पेशाब में बार-बार झाग दिखाई देना
  • पेशाब में खून आना
  • पेशाब की मात्रा कम या ज्यादा होना
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द
  • रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना

इनमें से कुछ लक्षण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या अन्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

किडनी की समस्या में शरीर पर क्यों आती है सूजन?

स्वस्थ किडनी शरीर में मौजूद अतिरिक्त पानी और नमक को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इसका असर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है।

शुरुआत में पैरों और टखनों में सूजन देखी जा सकती है। कुछ मामलों में चेहरे या आंखों के आसपास भी सूजन नजर आती है। अगर सुबह उठने के बाद आंखों के आसपास लगातार सूजन रहती है, तो इसे केवल थकान मानकर छोड़ना उचित नहीं है।

किन लोगों में किडनी की बीमारी का जोखिम ज्यादा रहता है?

कुछ स्थितियां किडनी को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ा सकती हैं। खासतौर पर इन लोगों को अपनी किडनी की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए:

  • डायबिटीज से पीड़ित लोग
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति
  • मोटापे की समस्या वाले लोग
  • धूम्रपान करने वाले लोग
  • अधिक शराब का सेवन करने वाले लोग
  • परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रखने वाले लोग
  • लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोग
  • बुजुर्ग व्यक्ति

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को प्रभावित करने वाले प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इन स्थितियों को नियंत्रित रखना किडनी की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

कब करवानी चाहिए किडनी की जांच?

अगर थकान, सूजन या पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। खासकर निम्न परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है:

  • शरीर में लगातार सूजन रहना
  • पेशाब के पैटर्न में बदलाव
  • बिना स्पष्ट कारण लगातार थकान होना
  • ब्लड प्रेशर का बार-बार बढ़ना
  • बार-बार यूरिन इंफेक्शन होना
  • डायबिटीज के साथ कमजोरी या अन्य नए लक्षण बढ़ना

डॉक्टर स्थिति के अनुसार अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं।

1. यूरिन टेस्ट

इस जांच से पेशाब में प्रोटीन, खून या अन्य असामान्य चीजों की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलती है।

2. ब्लड टेस्ट

ब्लड टेस्ट के जरिए क्रिएटिनिन और अन्य संबंधित पैरामीटर की जांच की जाती है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता का आकलन किया जा सकता है।

3. eGFR टेस्ट

eGFR यानी estimated Glomerular Filtration Rate किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान लगाने में मदद करता है।

4. अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड से किडनी की संरचना, आकार और कुछ अन्य संभावित असामान्यताओं की जानकारी मिल सकती है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ सामान्य उपाय मददगार हो सकते हैं:

पर्याप्त पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। हालांकि, जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

नमक का सेवन सीमित रखें: ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और लंबे समय में इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है।

ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें: डायबिटीज और हाई बीपी को कंट्रोल में रखना किडनी की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

बिना सलाह दवाएं न लें: कुछ दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। किसी भी दवा का नियमित सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।

धूम्रपान और शराब से बचें: ये आदतें लंबे समय में शरीर के कई अंगों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं: खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी के जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करवानी चाहिए।

क्या समय पर इलाज से किडनी को बचाया जा सकता है?

कई मामलों में बीमारी की जल्दी पहचान होने पर उसके कारण और स्थिति के अनुसार उपचार से किडनी को होने वाले नुकसान को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, खानपान और दवाओं से जुड़ी सावधानियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वहीं, किडनी की गंभीर बीमारी का लंबे समय तक इलाज न होने पर स्थिति बिगड़ सकती है और कुछ मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट जैसी उपचार पद्धतियों की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए शुरुआती संकेतों को समझना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

किडनी की बीमारी कई बार धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआत में इसके लक्षण बेहद सामान्य दिखाई दे सकते हैं। लगातार थकान और कमजोरी, पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में बदलाव और रात में बार-बार पेशाब आना ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए।

खासकर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों को किडनी की नियमित जांच के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। याद रखें, इन लक्षणों का मतलब हमेशा किडनी की बीमारी होना नहीं है, लेकिन लगातार बने रहने वाले या नए लक्षणों की सही वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

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