अगर आप अपनी बचत को सुरक्षित निवेश में लगाना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए यह निवेश और भी फायदेमंद साबित हो सकता है। देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक ब्याज दर का लाभ देता है। आइए जानते हैं कि 12 महीने की SBI FD पर किसे कितना ब्याज मिलेगा।
SBI FD पर कितना ब्याज मिल रहा है?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं पर आकर्षक ब्याज दरें दे रहा है। बैंक की ओर से 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के ग्राहकों के लिए अतिरिक्त ब्याज की सुविधा उपलब्ध है, जिससे उनकी बचत पर बेहतर रिटर्न मिलता है।
12 महीने की FD पर कितना मिलेगा रिटर्न?
अगर आप SBI में 12 महीने की अवधि के लिए FD कराते हैं, तो ब्याज दर आपकी उम्र के आधार पर तय होगी।
- 60 वर्ष से कम आयु के ग्राहकों को 12 महीने की FD पर 6.25% वार्षिक ब्याज मिलता है।
- 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को इसी अवधि की FD पर 6.75% ब्याज दिया जाता है।
- 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के अति वरिष्ठ नागरिकों (Super Senior Citizens) को 6.85% वार्षिक ब्याज का लाभ मिलता है।
इस तरह वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक रिटर्न प्राप्त होता है।
सीनियर सिटीजन्स को मिलता है अतिरिक्त लाभ
SBI अपने वरिष्ठ नागरिक ग्राहकों को सामान्य ब्याज दर के मुकाबले 0.50% अतिरिक्त ब्याज प्रदान करता है। वहीं, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के ग्राहकों को वरिष्ठ नागरिकों की दर के ऊपर 0.10% अतिरिक्त ब्याज भी मिलता है। इससे उनकी कुल ब्याज आय और बढ़ जाती है।
आखिरी बार कब बदली थीं SBI की FD ब्याज दरें?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरों में आखिरी बार दिसंबर 2025 में बदलाव किया था। इसके बाद से बैंक ने FD की ब्याज दरों में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया है और फिलहाल वही दरें लागू हैं।
RBI के रेपो रेट का FD पर क्या असर पड़ता है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। इससे पहले दिसंबर 2025 में RBI ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती की थी।
आमतौर पर रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर बैंकों की लोन और फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरों पर पड़ता है। जब रेपो रेट घटता है तो FD और लोन की ब्याज दरों में कमी आने की संभावना रहती है, जबकि रेपो रेट बढ़ने पर दोनों की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।