Car Modification Rules: इन बदलावों पर लग सकता है भारी चालान, जानें कौन-से मॉडिफिकेशन हैं कानूनी

Saroj kanwar
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अपनी कार को स्टाइलिश और दूसरों से अलग दिखाने के लिए कई लोग उसमें आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज और मॉडिफिकेशन करवाते हैं। हालांकि, हर तरह का बदलाव मोटर व्हीकल नियमों के तहत मान्य नहीं होता। कुछ मॉडिफिकेशन ऐसे हैं जिन पर ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई कर सकती है और जुर्माने के साथ वाहन जब्त होने की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए कार में कोई बदलाव कराने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह नियमों के अनुरूप है या नहीं।

इन कार मॉडिफिकेशन पर हो सकती है कार्रवाई

1. तेज आवाज वाला एग्जॉस्ट
कार में ऐसा आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट या साइलेंसर लगाना जो अत्यधिक शोर करता हो, नियमों के खिलाफ हो सकता है। खासतौर पर पटाखे जैसी आवाज निकालने वाले एग्जॉस्ट पर कार्रवाई की जा सकती है।

2. सस्पेंशन या चेसिस में बदलाव
वाहन की मूल ऊंचाई को काफी ज्यादा बढ़ाना या कम करना और चेसिस के स्ट्रक्चर में अनधिकृत बदलाव करना कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है।

3. शीशों पर डार्क फिल्म
कार की विंडो पर नियमों के तय मानकों से अधिक डार्क सन फिल्म लगाना प्रतिबंधित है। वाहन के शीशों में निर्धारित स्तर की विजिबिलिटी बनाए रखना जरूरी होता है।

4. प्रेशर और मल्टी-टोन हॉर्न
बहुत तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न या मल्टी-टोन हॉर्न का इस्तेमाल सामान्य कारों में अनुमत नहीं है। ऐसे हॉर्न लगाने पर ट्रैफिक पुलिस चालान कर सकती है।

5. RC में दर्ज रंग बदलना
अगर कार का रंग उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC में दर्ज रंग से अलग कर दिया जाता है, तो इसे वैध कराने के लिए संबंधित परिवहन विभाग की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

6. जरूरत से ज्यादा बड़े अलॉय व्हील और टायर
ऐसे बड़े व्हील या टायर जो वाहन की बॉडी से बाहर निकलते हों या निर्माता के निर्धारित स्पेसिफिकेशन से काफी अलग हों, सुरक्षा और नियम दोनों के लिहाज से समस्या पैदा कर सकते हैं।

कौन-से कार मॉडिफिकेशन आमतौर पर किए जा सकते हैं?

कार की प्रोटेक्टिव रैपिंग और PPF
पेंट की सुरक्षा के लिए पारदर्शी PPF या क्लियर रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते इससे वाहन के मूल रंग और उसकी पहचान में कोई अनुचित बदलाव न हो।

इंटीरियर और उपयोगी एक्सेसरीज
रिवर्स पार्किंग कैमरा, इंफोटेनमेंट सिस्टम, सीट कवर और उपयुक्त एंबिएंट लाइटिंग जैसी एक्सेसरीज लगाई जा सकती हैं। रूफ रैक जैसी चीजों के मामले में भी यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे वाहन के नियमों और निर्माता की सीमाओं के अनुरूप हों।

मान्यता प्राप्त CNG किट
पेट्रोल या डीजल कार में स्वीकृत CNG किट लगाई जा सकती है। लेकिन किट लगने के बाद वाहन के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव दर्ज कराना जरूरी होता है।

निर्माता के अनुरूप टायर और अलॉय व्हील
कार कंपनी द्वारा बताए गए अनुमत साइज और स्पेसिफिकेशन के टायर व अलॉय व्हील का इस्तेमाल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा बड़े या अलग साइज के व्हील लगाने से पहले नियमों की जांच करना बेहतर है।

मॉडिफिकेशन कराने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

कार के कलर, इंजन, फ्यूल टाइप या अन्य प्रमुख तकनीकी विशेषताओं में बड़ा बदलाव कराने से पहले संबंधित RTO से नियमों और अनुमति की जानकारी जरूर लें। जहां आवश्यक हो, बदलाव को RC में अपडेट कराना भी जरूरी है।

निष्कर्ष: कार को आकर्षक बनाने के लिए मॉडिफिकेशन करवाना गलत नहीं है, लेकिन ऐसा बदलाव जो वाहन की मूल संरचना, सुरक्षा, शोर या निर्धारित मानकों को प्रभावित करे, कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए किसी भी आफ्टरमार्केट मॉडिफिकेशन से पहले उसके नियमों की पुष्टि जरूर करें।

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