When to Change Car Tyres: कार की सेफ्टी में टायर की भूमिका बेहद अहम होती है। सड़क पर कार की पकड़, ब्रेकिंग और बैलेंस काफी हद तक टायरों की स्थिति पर निर्भर करते हैं। अक्सर लोग टायर पूरी तरह घिस जाने के बाद ही उन्हें बदलने के बारे में सोचते हैं, जबकि इससे पहले ही कई ऐसे संकेत मिलने लगते हैं जो बताते हैं कि अब नए टायर लगवाने का समय आ गया है।
अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए तो खासकर गीली सड़क पर कार की ग्रिप कमजोर हो सकती है, ब्रेकिंग प्रभावित हो सकती है और ड्राइविंग के दौरान जोखिम बढ़ सकता है। आइए जानते हैं वे कौन से संकेत हैं, जिन पर कार मालिकों को ध्यान देना चाहिए।
बारिश में टायर की पकड़ कम हो जाए
गीली या बारिश वाली सड़क पर अगर कार पहले की तुलना में ज्यादा स्लिप करने लगे या ब्रेक लगाने पर सड़क पर पकड़ कम महसूस हो, तो यह टायरों के घिसने का संकेत हो सकता है। टायर की सतह पर बने ट्रेड सड़क के साथ ग्रिप बनाए रखने में मदद करते हैं। समय के साथ ट्रेड घिसने लगते हैं और इससे खासकर गीली सड़क पर टायर की पकड़ प्रभावित हो सकती है।
साइड वॉल पर दरारें या उभार दिखाई दें
टायर की साइड वॉल पर नजर आने वाली दरार, कट या असामान्य उभार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक धूप में खड़ी रहने या उम्र बढ़ने के साथ रबर की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे टायर कमजोर हो सकते हैं और तेज गति पर सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकते हैं।
40,000-50,000 किलोमीटर चल चुके हों
कार के टायरों की सामान्य लाइफ कई मामलों में करीब 40,000 से 50,000 किलोमीटर तक हो सकती है। हालांकि यह कोई तय सीमा नहीं है, क्योंकि टायर कितने समय तक अच्छे रहेंगे, यह ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, टायर की क्वालिटी और मेंटेनेंस पर भी निर्भर करता है।
अगर आपकी कार इस दायरे के आसपास चल चुकी है, तो टायरों की प्रोफेशनल जांच करा लेना बेहतर है। केवल ऊपर से ठीक दिखाई देने के आधार पर उनकी स्थिति को सही नहीं मानना चाहिए।
टायर का घिसाव बराबर न हो
अगर टायर का एक हिस्सा दूसरे हिस्से की तुलना में ज्यादा घिसा हुआ नजर आए, तो इसके पीछे व्हील अलाइनमेंट या दूसरे मैकेनिकल कारण हो सकते हैं। लंबे समय तक असमान घिसावट जारी रहने पर टायर की परफॉर्मेंस और कार की हैंडलिंग प्रभावित हो सकती है।
ऐसी स्थिति में कार एक तरफ खिंच सकती है और टायरों का घिसाव भी तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए समस्या का कारण पता करवाना और जरूरत पड़ने पर टायर बदलना जरूरी है।
टायर 5-6 साल पुराने हो जाएं
टायर बदलने के लिए केवल किलोमीटर देखना पर्याप्त नहीं है। उनकी उम्र भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। आमतौर पर 5 से 6 साल पुराने टायरों की स्थिति की जांच करवाकर उन्हें बदलने पर विचार किया जाता है, भले ही कार ज्यादा न चली हो।
टायर पर मौजूद मैन्युफैक्चरिंग डेट देखकर उसकी उम्र का पता लगाया जा सकता है। पुराना टायर बाहर से सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसकी रबर कमजोर हो सकती है।
सिर्फ पूरी तरह घिसने का इंतजार न करें
कार के टायर बदलने का सही समय केवल इस बात से तय नहीं होता कि वे पूरी तरह घिस चुके हैं या नहीं। ग्रिप में कमी, साइड वॉल पर दरार या उभार, असमान घिसावट, ज्यादा किलोमीटर और टायर की उम्र जैसे संकेत भी महत्वपूर्ण हैं।
समय-समय पर टायरों की जांच करवाने और इन संकेतों पर ध्यान देने से ड्राइविंग को ज्यादा सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।