Cyber Crime: साइबर ठगी के मामलों में अब पूरा बैंक अकाउंट नहीं होगा फ्रीज, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

Saroj kanwar
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लखनऊ: साइबर अपराध से जुड़े मामलों में बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज करने की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी बैंक खाते में साइबर अपराध से जुड़ी संदिग्ध रकम सीमित है, तो पुलिस या साइबर सेल पूरे खाते को ‘डेबिट फ्रीज’ नहीं कर सकती। खाते पर रोक केवल संदिग्ध रकम तक ही सीमित रखी जानी चाहिए।

संदिग्ध रकम तक ही लगाया जा सकेगा लियन

हाईकोर्ट ने कहा कि साइबर क्राइम की जांच के दौरान बैंक खाते पर लगाई जाने वाली रोक अपराध से जुड़ी रकम के अनुपात में होनी चाहिए। जांच अधिकारी की ओर से बैंक को भेजे जाने वाले नोटिस में यह साफ तौर पर बताया जाना जरूरी है कि कितनी रकम पर लियन (Lien) लगाया जाना है।

कोर्ट के मुताबिक, सिर्फ संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के आधार पर किसी व्यक्ति के पूरे बैंक खाते को ब्लॉक करना उचित नहीं है। खाते में मौजूद ऐसी रकम, जिसका अपराध से कोई संबंध नहीं है, उसके इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

लखनऊ के कारोबारी की याचिका पर आया फैसला

यह आदेश लखनऊ के कारोबारी रितेश यादव की याचिका पर सुनाया गया। निर्माण कार्य और निर्माण सामग्री की सप्लाई से जुड़े यादव ने अदालत को बताया कि कर्नाटक में दर्ज एक साइबर अपराध की जांच के दौरान उनके बैंक खाते में 36,000 रुपये की संदिग्ध रकम ट्रांसफर हुई थी।

याचिकाकर्ता के अनुसार, इस लेनदेन की जांच के चलते उनके बंधन बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक में मौजूद खातों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया। इससे उनके कारोबार से जुड़े सामान्य बैंकिंग लेनदेन भी प्रभावित हुए और उनका व्यवसाय लगभग ठप हो गया।

खातों को डी-फ्रीज करने का निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित बैंकों को खातों को डी-फ्रीज करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि 36,000 रुपये की संदिग्ध रकम पर लियन बना रहेगा

वहीं, इस रकम से अधिक खाते में मौजूद धनराशि को कारोबारी इस्तेमाल कर सकेंगे। यानी जांच के नाम पर पूरे खाते की रकम को रोककर रखने की अनुमति नहीं होगी।

जांच अधिकारियों के लिए हाईकोर्ट ने तय की प्रक्रिया

अदालत ने साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों पर रोक लगाने को लेकर जांच अधिकारियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • बैंक को भेजे जाने वाले नोटिस में FIR या अपराध संख्या की पूरी जानकारी देनी होगी।
  • खाते पर रोक लगाने का स्पष्ट कारण बताया जाना जरूरी होगा।
  • जिस रकम पर लियन लगाया जाना है, उसकी सटीक राशि नोटिस में दर्ज करनी होगी।
  • बैंक खाते को पूरी तरह फ्रीज करने के बजाय कार्रवाई को संदिग्ध रकम तक सीमित रखना होगा।
  • कानून के मुताबिक, खाते पर इस तरह की कार्रवाई की जानकारी संबंधित क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी देनी होगी।

कारोबार को पूरी तरह रोकना उचित नहीं

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि साइबर अपराध की जांच के लिए बैंक खाते को फ्रीज करने की शक्ति का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए, जिससे किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय गतिविधियां और वैध कारोबार बाधित हो जाए।

इस फैसले से उन लोगों को राहत मिल सकती है, जिनके बैंक खातों में किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन के कारण पूरी रकम पर रोक लगा दी जाती है। अदालत के आदेश का मूल संदेश यही है कि साइबर अपराध की जांच जरूरी है, लेकिन कार्रवाई संदिग्ध रकम तक ही आनुपातिक और सीमित रहनी चाहिए।

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