RBI MPC बैठक पर सबकी नजर, क्या बढ़ेगा रेपो रेट? SBI और HDFC बैंक के शेयर क्यों टूटे?

Saroj kanwar
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RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और अब पूरे देश की नजर 5 अगस्त को आने वाले फैसले पर टिकी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हो रही यह वित्त वर्ष 2026 की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा है, जिसे इस साल की सबसे अहम बैठकों में गिना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि देश की अर्थव्यवस्था इस समय बढ़ती महंगाई और धीमी होती आर्थिक विकास दर जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है।

RBI के फैसले से पहले बैंकिंग शेयरों पर दबाव

एमपीसी बैठक के नतीजों से पहले शेयर बाजार में खासकर बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में निफ्टी बैंक इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 57,651.15 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट ने निवेशकों के बीच यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या बाजार पहले से ही आरबीआई की सख्त मौद्रिक नीति की आशंका जता रहा है।

आखिर क्यों गिरे बैंकिंग शेयर?

आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आमतौर पर ब्याज दरों से जुड़े फैसलों का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ता है। फिलहाल बाजार की नजर रेपो रेट पर टिकी हुई है। अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए केंद्रीय बैंक 25 बेसिस प्वाइंट (bps) तक रेपो रेट बढ़ाने का फैसला भी ले सकता है।

किन बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?

मंगलवार को निजी क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली।

  • फेडरल बैंक के शेयर करीब 3% तक टूट गए।
  • एक्सिस बैंक में लगभग 1.5% की गिरावट दर्ज हुई।
  • एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और इंडसइंड बैंक के शेयर 0.5% से 1% तक कमजोर रहे।

हालांकि, सरकारी बैंकों ने बेहतर प्रदर्शन किया। केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि निवेशक हर बैंक को उसकी वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर आंक रहे हैं।

ब्याज दरों का बैंकिंग सेक्टर पर क्यों पड़ता है असर?

बैंकों की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत लोन होता है। बैंक कम ब्याज पर जमा राशि लेकर ज्यादा ब्याज पर कर्ज देते हैं। यदि आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए केंद्रीय बैंक से उधार लेना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं।

महंगे कर्ज के कारण लोग और कंपनियां नए लोन लेने से बचती हैं, जिससे बैंकों की लोन ग्रोथ और भविष्य की कमाई पर असर पड़ता है। इसी आशंका के चलते निवेशक अक्सर बैंकिंग शेयरों में बिकवाली शुरू कर देते हैं।

इस बार की MPC बैठक क्यों है खास?

इस बार की बैठक कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • देश में खुदरा महंगाई लगातार बढ़ रही है।
  • आर्थिक विकास की रफ्तार कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
  • वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।

ऐसे माहौल में आरबीआई के सामने महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।

पिछली MPC बैठक में क्या हुआ था?

जून 2026 में हुई पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था। उस समय केंद्रीय बैंक ने कहा था कि आगे का फैसला आने वाले आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति को देखकर लिया जाएगा। हालांकि बाद में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण महंगाई फिर से बढ़ने लगी।

बाजार की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आरबीआई महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सख्त रुख अपनाएगा या आर्थिक विकास को प्राथमिकता देते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखेगा।

अगर रेपो रेट बढ़ाया जाता है तो—

  • होम लोन महंगे हो सकते हैं।
  • कार और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है।
  • कंपनियों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाएगा।
  • बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।

वहीं, यदि आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है तो निवेशकों को राहत मिल सकती है और बैंकिंग शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

आरबीआई का फैसला केवल बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, एनबीएफसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, एफएमसीजी और पूरे शेयर बाजार पर पड़ सकता है।

इसी वजह से निवेशकों की नजर केवल रेपो रेट पर नहीं, बल्कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान, महंगाई के अनुमान, जीडीपी ग्रोथ के पूर्वानुमान और भविष्य की मौद्रिक नीति के संकेतों पर भी रहेगी।

निष्कर्ष

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ती महंगाई और सुस्त आर्थिक विकास जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। बैठक से पहले बैंकिंग शेयरों में आई गिरावट बाजार की सतर्कता को दर्शाती है। हालांकि अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रह सकता है, लेकिन अंतिम फैसला और आरबीआई का रुख ही आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेगा।

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