एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र लिखकर PF क्लेम के निपटान में हो रही देरी, तकनीकी ढांचे की कमजोरियों और कर्मचारियों की कमी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो करोड़ों EPF सदस्यों को समय पर सेवाएं देना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
CITES सिस्टम के बावजूद लाखों क्लेम लंबित
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 3 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र में EPF ऑफिसर्स एसोसिएशन ने बताया कि EPFO ने क्लेम प्रोसेसिंग को तेज और डिजिटल बनाने के लिए Centralised IT Enabled System (CITES) लागू किया है। हालांकि, इसके बावजूद लाखों ऑटो-प्रोसेस्ड क्लेम 20 दिनों से अधिक समय से लंबित पड़े हैं।
एसोसिएशन का दावा है कि इस सिस्टम के जरिए अधिकांश PF क्लेम दो से तीन दिनों के भीतर स्वतः निपटाए जाने थे, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। बड़ी संख्या में आवेदन बिना किसी स्पष्ट कारण के रुके हुए हैं और न तो संबंधित कार्यालयों को और न ही सदस्यों को इसकी जानकारी मिल रही है।
बढ़ती शिकायतों का सामना कर रहे हैं अधिकारी
पत्र में कहा गया है कि फील्ड स्तर पर कार्यरत EPFO अधिकारी लगातार शिकायत पोर्टल, सोशल मीडिया और सीधे आने वाली शिकायतों का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, सार्वजनिक स्तर पर यह संदेश दिया जा रहा है कि PF क्लेम केवल दो दिनों में निपटाए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों और सदस्यों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
फिलहाल इन आरोपों पर EPFO या श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
CITES प्रोजेक्ट में देरी का भी आरोप
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि CITES परियोजना जनवरी 2023 में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) को 10 महीने की समयसीमा के साथ सौंपी गई थी। लेकिन निर्धारित समय में इसे पूरा नहीं किया जा सका और जुलाई 2026 से इसका केवल आंशिक संचालन ही शुरू हो पाया है।
कर्मचारियों और IT विशेषज्ञों की कमी बनी बड़ी चुनौती
पत्र में EPFO के भीतर लंबे समय से चल रही स्टाफ की कमी का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2004 के बाद से इंफॉर्मेशन सर्विसेज डिवीजन (ISD) में कोई सीधी भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों से संगठन के पास पूर्णकालिक चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) भी नहीं है।
एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान स्टाफिंग पैटर्न मार्च 2008 में स्वीकृत पदों पर आधारित है, जबकि इस दौरान EPFO के सदस्यों की संख्या और डिजिटल सेवाओं का दायरा कई गुना बढ़ चुका है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों के कार्यालय सीमित कर्मचारियों के साथ अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं।
EPS में बदलाव की भी उठी मांग
अधिकारियों के संगठन ने एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) में सुधार की आवश्यकता भी बताई है। उनका कहना है कि ब्याज दरों में लगातार कमी आने से मौजूदा पेंशन व्यवस्था पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।
पत्र में सुझाव दिया गया है कि पेंशन से जुड़े निकासी (Withdrawal) नियमों की समीक्षा की जाए। इसके लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के मॉडल का उदाहरण दिया गया, जहां रिटायरमेंट फंड की सुरक्षा के लिए निकासी के नियम अपेक्षाकृत सख्त हैं।
वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति नीति की समीक्षा की मांग
एसोसिएशन ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि EPFO के वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर बाहरी अधिकारियों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जाए। उनका मानना है कि संगठन के भीतर कार्य का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को नीति निर्माण में अधिक अवसर मिलने से संस्थान की कार्यक्षमता और सेवा गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
EPFO लगातार कर रहा है डिजिटल सुधार
हाल के महीनों में EPFO ने सेवाओं को अधिक तेज और पारदर्शी बनाने के लिए कई डिजिटल पहल शुरू की हैं। इनमें EPF Scheme 2026 और CITES आधारित नई डिजिटल प्रक्रियाएं शामिल हैं। संगठन ने यह स्वीकार किया है कि तकनीकी अपग्रेड के दौरान कुछ समय के लिए सेवाओं में व्यवधान आया, लेकिन उसका उद्देश्य भविष्य में सदस्यों को अधिक तेज, आसान और निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराना है।