NPS Update: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले लोगों का पैसा पेंशन फंड मैनेजर द्वारा इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड जैसे विभिन्न निवेश विकल्पों में लगाया जाता है। यदि आपको किसी फंड मैनेजर का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं लगता है, तो उसे बदलने की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, केवल कुछ महीनों या एक साल के प्रदर्शन को देखकर निर्णय लेना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे लंबे समय की रिटायरमेंट प्लानिंग प्रभावित हो सकती है।
लगातार कमजोर प्रदर्शन होने पर ही करें बदलाव
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि फंड मैनेजर बदलने का फैसला तभी लेना चाहिए, जब उसका प्रदर्शन लगातार तीन से पांच वर्षों तक अपने बेंचमार्क और अन्य फंड मैनेजरों से कमजोर रहे। उदाहरण के तौर पर यदि एक फंड मैनेजर पिछले चार वर्षों में औसतन 11% वार्षिक रिटर्न दे रहा है और दूसरा केवल 8% तक सीमित है, तब बदलाव पर विचार किया जा सकता है। लेकिन केवल एक साल के खराब प्रदर्शन के आधार पर फंड बदलना समझदारी नहीं होगी।
बार-बार फंड बदलने से हो सकता है नुकसान
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे में हर साल सबसे अधिक रिटर्न देने वाले फंड के पीछे भागना निवेशकों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि आप हर बार बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड में शिफ्ट होते रहेंगे, तो कई बार बाजार में सही समय पर निवेश का लाभ नहीं मिल पाएगा। इससे लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा भी कम हो सकता है, जो रिटायरमेंट फंड बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
सिर्फ रिटर्न नहीं, जोखिम का भी करें मूल्यांकन
फंड चुनते समय केवल अधिक रिटर्न को ही आधार नहीं बनाना चाहिए। निवेश से जुड़े जोखिम, बाजार में गिरावट के दौरान फंड का प्रदर्शन, पोर्टफोलियो की गुणवत्ता और निवेश की रणनीति जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। कई बार 11% रिटर्न देने वाला अपेक्षाकृत सुरक्षित फंड, 12% रिटर्न वाले अधिक जोखिम वाले फंड से बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
इन गलतियों से हमेशा बचें
- केवल पिछले एक साल के रिटर्न को देखकर फंड का चयन न करें।
- बार-बार पेंशन फंड मैनेजर बदलने से बचें।
- इक्विटी और डेट फंड के प्रदर्शन की सीधे तुलना न करें।
- ज्यादा रिटर्न के लालच में जोखिम को नजरअंदाज न करें।
- बाजार में गिरावट आते ही जल्दबाजी में फंड बदलने का फैसला न लें।
लंबी अवधि का निवेश है NPS
नेशनल पेंशन सिस्टम 20 से 30 साल तक चलने वाला दीर्घकालिक निवेश है। इसलिए इसमें धैर्य बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि किसी फंड मैनेजर का प्रदर्शन लगातार कई वर्षों तक कमजोर बना रहे, तभी बदलाव पर विचार करना उचित माना जाता है। इससे आपका रिटायरमेंट कॉर्पस बेहतर तरीके से तैयार हो सकता है।
NPS खाता खोलने के लिए जरूरी बातें
- 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक NPS में निवेश कर सकता है। इसमें नौकरीपेशा, स्वरोजगार करने वाले, व्यवसायी और एनआरआई भी शामिल हैं।
- NPS खाता बैंक, डाकघर, प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) या ऑनलाइन eNPS पोर्टल के माध्यम से खोला जा सकता है।
- पंजीकरण पूरा होने के बाद निवेशक को PRAN (Permanent Retirement Account Number) जारी किया जाता है, जिसकी मदद से नियमित निवेश और पेंशन खाते का प्रबंधन किया जाता है।