नई दिल्ली. इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख नजदीक है और ऐसे में कई लोग जल्दबाजी में रिटर्न भर रहे हैं. जल्दबाजी के कारण छोटी-छोटी गलतियां बाद में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती हैं. खासतौर पर दो मामलों में टैक्सपेयर्स सबसे ज्यादा चूक करते हैं—बैंक से मिलने वाला ब्याज और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG).
कई लोगों को लगता है कि अगर बैंक ने ब्याज पर टीडीएस काट लिया है या एलटीसीजी 1.25 लाख रुपये से कम है, तो इसे आईटीआर में दिखाने की जरूरत नहीं है. लेकिन यह सोच गलत हो सकती है. इनकम टैक्स विभाग आपके द्वारा दाखिल की गई जानकारी का मिलान एआईएस (Annual Information Statement) और अन्य रिकॉर्ड से करता है. अगर किसी तरह का अंतर मिलता है तो विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जा सकता है.
ITR भरने से पहले AIS और Form 26AS जरूर चेक करें
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आईटीआर फाइल करने से पहले अपनी सभी इनकम डिटेल्स को एक बार जरूर जांच लेना चाहिए. इसके लिए एआईएस, टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) और फॉर्म 26AS जैसे दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है.
एआईएस में आपकी कमाई से जुड़ी कई जानकारियां पहले से दर्ज होती हैं. इसमें बैंक ब्याज, निवेश, सिक्योरिटीज से जुड़े लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की जानकारी शामिल हो सकती है. रिटर्न दाखिल करने से पहले इन दस्तावेजों को चेक करने से गलत जानकारी भरने की संभावना काफी कम हो जाती है.
बैंक ब्याज को लेकर सबसे ज्यादा होती है गलती
कई टैक्सपेयर्स की सबसे आम गलती बैंक से मिलने वाले ब्याज को लेकर होती है. लोगों को लगता है कि जब बैंक पहले ही टीडीएस काट चुका है, तो ब्याज की जानकारी आईटीआर में देने की जरूरत नहीं है.
हालांकि, इनकम टैक्स नियमों के अनुसार बैंक खाते, एफडी, रिकरिंग डिपॉजिट या अन्य जमा योजनाओं से मिलने वाले ब्याज को रिटर्न में दिखाना जरूरी होता है. सिर्फ टीडीएस कट जाने से आपकी पूरी टैक्स जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती.
टीडीएस केवल टैक्स जमा करने का एक तरीका है. यह आपकी कुल टैक्स देनदारी को तय नहीं करता. इसी गलतफहमी के कारण कई बार टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स विभाग की ओर से सेक्शन 143(1)(a) के तहत नोटिस मिल सकता है.
ब्याज आय को आईटीआर में दिखाना क्यों जरूरी है?
बैंकों द्वारा ग्राहकों को दिए गए ब्याज की जानकारी टैक्स विभाग तक पहुंचती है. यही वजह है कि यह डिटेल एआईएस और फॉर्म 26AS में दिखाई देती है.
बचत खाते के ब्याज, एफडी ब्याज, आरडी ब्याज और दूसरी बैंक जमा योजनाओं से हुई कमाई को आईटीआर में ‘Income from Other Sources’ के तहत दर्ज करना होता है. इसके अलावा पात्रता के अनुसार सेक्शन 80TTA और 80TTB के तहत मिलने वाली छूट का दावा भी किया जा सकता है.
ITR फाइल करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
- रिटर्न भरने से पहले एआईएस, टीआईएस और फॉर्म 26AS में दर्ज जानकारी जरूर जांच लें.
- बैंक से मिले ब्याज की जानकारी को आईटीआर में सही तरीके से शामिल करें.
- अगर किसी इनकम पर टीडीएस कटा है, तो उसे अलग से चेक करें और अपनी कुल टैक्स देनदारी का हिसाब लगाएं.
- आईटीआर में दी गई जानकारी और टैक्स विभाग के रिकॉर्ड में अंतर नहीं होना चाहिए.