सोने की कीमतों में एक बार फिर जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की बढ़ती मांग के चलते गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव सात सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना जल्द ही ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर पार करेगा या फिर मौजूदा तेजी के बाद मुनाफावसूली के कारण कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों ने सोने के अगले संभावित लक्ष्य और महत्वपूर्ण सपोर्ट-रेजिस्टेंस लेवल बताए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि मौजूदा बाजार संकेत क्या इशारा कर रहे हैं।
MCX पर सात हफ्ते के उच्च स्तर के करीब पहुंचा सोना
एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत 536 रुपये यानी 0.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,49,029 रुपये प्रति 10 ग्राम पर हुई। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 1,49,700 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले बंद भाव की तुलना में 1,207 रुपये यानी करीब 0.81 प्रतिशत अधिक थी।
वहीं, चांदी में भी शुरुआती कारोबार के दौरान अच्छी खरीदारी देखने को मिली। सितंबर डिलीवरी वाली सिल्वर का भाव इंट्राडे में 2,28,397 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। हालांकि बाद में निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते चांदी फिसल गई और 583 रुपये यानी 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,27,001 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई सोने की चमक
वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतों में मजबूती बनी रही। कॉमेक्स (COMEX) पर गोल्ड 0.36 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,320 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि चांदी 0.12 प्रतिशत बढ़कर 62.36 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की संभावना जताई गई है। वहीं अमेरिका की ओर से ईरान के साथ समझौते की कोशिशों के संकेत भी मिले हैं।
यदि क्षेत्रीय तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आ सकता है। इससे महंगाई में राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों को लेकर दबाव कम हो सकता है। इसी कारण अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है, जिसका सीधा फायदा सोने की कीमतों को मिल रहा है।
₹1.50 लाख का स्तर बना सबसे अहम रेजिस्टेंस
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1,50,000 रुपये से 1,50,700 रुपये प्रति 10 ग्राम का दायरा सबसे महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन है। यदि सोना इस स्तर को मजबूती से पार कर लेता है, तो इसके बाद कीमतें 1,52,200 रुपये से 1,52,800 रुपये तक पहुंच सकती हैं।
दूसरी ओर, 1,48,600 रुपये से 1,48,000 रुपये का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि कीमतें इसके नीचे फिसलती हैं तो अगला सपोर्ट 1,46,600 रुपये से 1,46,000 रुपये के बीच देखने को मिल सकता है।
टेक्निकल इंडिकेटर्स क्या बता रहे हैं?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने का भाव फिलहाल 20, 50, 100 और 200 दिनों की सभी प्रमुख एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के ऊपर बना हुआ है। यह बाजार में मजबूत तेजी का संकेत माना जाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि गोल्ड 1,49,000 रुपये के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है तो 1,50,000 रुपये का स्तर पार करने की संभावना काफी मजबूत हो सकती है। हालांकि यदि कीमतें 1,49,000 रुपये के नीचे आती हैं तो हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है।
चांदी में भी तेजी की संभावना, लेकिन इन स्तरों पर रखें नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चांदी 2,29,000 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर मजबूती से टिकती है तो इसका अगला लक्ष्य 2,31,500 रुपये से 2,32,500 रुपये तक हो सकता है।
वहीं, 2,25,000 रुपये से 2,24,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो कीमतें 2,22,000 रुपये से 2,21,000 रुपये के दायरे तक फिसल सकती हैं।
तकनीकी संकेतकों के अनुसार, चांदी फिलहाल 20 EMA और 200 EMA के ऊपर कारोबार कर रही है। वहीं RSI 54 के स्तर पर है और धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहा है। हालांकि मजबूत तेजी की पुष्टि के लिए 50 EMA के ऊपर क्लोजिंग को जरूरी माना जा रहा है।
कच्चे तेल में नरमी भी बनी बाजार की नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 0.51 प्रतिशत फिसलकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 1 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी आने वाले समय में महंगाई और कमोडिटी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब सोने, चांदी और क्रूड ऑयल—तीनों बाजारों की चाल पर बनी रहेगी।