सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोमवार को तेज बढ़त दर्ज करने के बाद मंगलवार को गोल्ड के दाम में फिर गिरावट आ गई। ताजा कारोबार में सोना 818 रुपये टूटकर 1,42,245 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या कुछ समय इंतजार करना बेहतर होगा? इसी बीच वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की नई रिपोर्ट ने आने वाले दिनों को लेकर बड़ा संकेत दिया है।
फिलहाल ठहरी हुई हैं कीमतें, लेकिन ज्यादा समय तक नहीं
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सोने की कीमतें इस समय एक अहम मोड़ पर हैं। बाजार में फिलहाल स्थिरता दिखाई दे रही है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में कीमतों पर और दबाव बन सकता है और सोना मौजूदा स्तर से नीचे भी फिसल सकता है।
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड बना रहे हैं दबाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि सोने की कीमतों पर सबसे बड़ा असर अमेरिका की आर्थिक स्थिति का पड़ रहा है। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और ऊंचे रियल बॉन्ड यील्ड निवेशकों का रुझान सोने से हटाकर दूसरे निवेश विकल्पों की ओर ले जा रहे हैं। यही वजह है कि गोल्ड की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है।
बाजार ने दिखाई हल्की रिकवरी
हालांकि पिछले सप्ताह सोने में हल्की रिकवरी भी देखने को मिली। कीमतें जून के निचले स्तर 3,943 डॉलर प्रति औंस से ऊपर उठीं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी 10-वर्षीय TIPS यील्ड 2.44 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह 2025 के उच्च स्तर को भी पार कर जाएगी, जिसका असर सोने पर नकारात्मक पड़ सकता है।
शेयर बाजार के साथ सोना भी आ सकता है दबाव में
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो शेयर बाजार में कमजोरी आ सकती है। इसके साथ ही सोने की कीमतों में भी और गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि हाल के दिनों में निवेशकों की डिप-बाइंग यानी कीमतें गिरने पर खरीदारी करने की रणनीति ने बाजार को कुछ सहारा जरूर दिया है।
4,000 डॉलर के ऊपर पहुंचा अंतरराष्ट्रीय सोना
लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के आंकड़ों के अनुसार, बीते सप्ताह सोने की कीमतों में करीब 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 4,067 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। इसके साथ ही सोने ने एक बार फिर 4,000 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण स्तर हासिल कर लिया।
डिप-बाइंग ने दी कीमतों को मजबूती
विश्लेषकों का कहना है कि हालिया तेजी की सबसे बड़ी वजह निचले स्तर पर हुई खरीदारी रही। मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के बावजूद निवेशकों ने गिरावट का फायदा उठाकर खरीदारी की, जिससे सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिकने में सफल रहा।
तकनीकी संकेत क्या कहते हैं?
तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, मौजूदा उछाल को अभी लंबी अवधि की तेजी नहीं माना जा सकता। जनवरी से जारी गिरावट के ट्रेंड में इसे केवल अस्थायी सुधार माना जा रहा है। यदि कीमतों में दोबारा कमजोरी आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का अगला मजबूत सपोर्ट 3,857 डॉलर से 3,887 डॉलर प्रति औंस के बीच माना जा रहा है।
आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर?
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,048.98 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर टिप्पणी और महंगाई के आंकड़े सोने की दिशा तय करेंगे। यदि फेड सख्त रुख अपनाता है या महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है, तो डॉलर और मजबूत हो सकता है, जिससे सोने की कीमतों पर फिर दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत में क्या रह सकता है अगला स्तर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने का मौजूदा भाव लगभग ₹1,24,750 के आसपास माना जा रहा है, जबकि पिछले सप्ताह रिकवरी का प्रमुख स्तर करीब ₹1,25,300 था। यदि बाजार में दोबारा बिकवाली बढ़ती है, तो कीमतें ₹1,18,800 से ₹1,19,750 के दायरे तक फिसल सकती हैं। ऐसे में निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों को जल्दबाजी करने के बजाय बाजार की चाल पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।