पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 4,400 से 4,600 डॉलर प्रति औंस के सीमित दायरे में कारोबार करती रहीं। नए सप्ताह की शुरुआत भी सतर्क माहौल में हुई और गोल्ड की कीमतें करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई हैं। मौजूदा स्तर जनवरी में बने रिकॉर्ड हाई से लगभग 19 प्रतिशत नीचे है, जबकि युद्ध-पूर्व स्तर की तुलना में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सख्त नीति और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। हाल के दिनों में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर को प्राथमिकता दी, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और महंगाई की चिंताओं ने गोल्ड को बड़े स्तर पर टूटने से बचाए रखा है।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि 4,500 डॉलर का स्तर फिलहाल गोल्ड के लिए अहम सपोर्ट बना हुआ है। यदि कीमतें इस स्तर से ऊपर टिकती हैं तो आने वाले हफ्तों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जारी रहने पर सोने में दबाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व के संकेत और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सोने की दिशा तय करेंगे। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता कितनी बढ़ती है और फेड ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।