Gold Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अहम बैठक पर टिकी है, जबकि मजबूत होते अमेरिकी डॉलर ने भी गोल्ड प्राइस पर दबाव बढ़ाया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशक बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं और यही वजह है कि सोने में कमजोरी देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना हुआ सस्ता
मंगलवार के कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड लगभग 4,056.03 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स का भाव करीब 4,056.70 डॉलर प्रति औंस रहा। दोनों ही कीमतों में करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
डॉलर की मजबूती बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती सोने की कीमतों में गिरावट का प्रमुख कारण है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब अन्य देशों की मुद्राओं के मुकाबले सोना खरीदना महंगा पड़ता है। इसका सीधा असर मांग पर पड़ता है और कीमतों में नरमी देखने को मिलती है।
फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी बाजार की नजर
इस समय वैश्विक निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक पर है। बाजार को उम्मीद है कि इस बार केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि निवेशक भविष्य की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा ही सोने की चाल तय कर सकती है।
ब्याज दरें बढ़ीं तो सोने पर बढ़ सकता है दबाव
बाजार में यह संभावना भी जताई जा रही है कि आने वाली बैठकों में फेड ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो बिना ब्याज वाला निवेश माने जाने वाले सोने की आकर्षण क्षमता कम हो सकती है और इसकी कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।
ट्रंप के बयान से भी बाजार सतर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वार्ता सफल नहीं होती है, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई का विकल्प अपना सकता है। इस बयान के बाद निवेशकों ने भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी नजरें बनाए रखी हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव अब भी बरकरार
हालांकि बातचीत जारी है, लेकिन पश्चिम एशिया की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक में ड्रोन हमलों की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
चीन से आए आंकड़ों ने क्या संकेत दिए?
दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल चीन से भी अहम आंकड़े सामने आए हैं। हांगकांग के जरिए चीन का सोना आयात पिछले साल की तुलना में बढ़ा है, हालांकि पिछले महीने के मुकाबले इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि सोने की मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन खरीदारी की गति पहले जैसी नहीं रही।
आगे क्या रह सकता है गोल्ड का रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों और उसके संकेतों पर निर्भर करेगी। यदि डॉलर और मजबूत होता है या फेड सख्त रुख अपनाता है, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता गहराती है, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग दोबारा तेज हो सकती है।