Gold Investment: क्या अभी सोना खरीदना है सही फैसला? जानें एक्सपर्ट की राय

Saroj kanwar
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सोने में निवेश करने वालों के लिए इस समय रणनीति बदलने की जरूरत हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में गोल्ड ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन अब ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) का मानना है कि तेजी वाले बाजार में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना ज्यादा समझदारी होगी।

सोने की कीमतों को अब कौन से कारक प्रभावित कर रहे हैं?

ब्रोकरेज के अनुसार, अब गोल्ड की कीमतें केवल वैश्विक तनाव या भू-राजनीतिक घटनाओं से तय नहीं हो रहीं। अमेरिकी महंगाई (Inflation), ब्याज दरें (Interest Rates) और रियल यील्ड (Real Yield) जैसे आर्थिक संकेतक भी सोने की चाल पर बड़ा असर डाल रहे हैं। इसलिए निवेश से पहले इन पहलुओं पर नजर रखना जरूरी है।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

MOFSL की सलाह है कि लंबे समय के निवेशक इस समय एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचें। इसके बजाय अलग-अलग स्तरों पर धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में मौजूदा स्तर से करीब 6% से 8% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके बाद अगले 12 से 15 महीनों में कीमतों में फिर से मजबूत तेजी आने की संभावना जताई गई है।

भारतीय निवेशकों के लिए कंपनी ने 1.30 लाख रुपये से 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच का स्तर खरीदारी के लिए आकर्षक बताया है। वहीं, मध्यम अवधि में 1.68 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और लंबी अवधि में 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लक्ष्य दिया गया है।

ब्याज दरों पर नजर रखना क्यों जरूरी है?

सोना ऐसा निवेश है जो फिक्स्ड डिपॉजिट या बॉन्ड की तरह नियमित ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब वास्तविक ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने की मांग और कीमतों पर दबाव आ सकता है।

दूसरी ओर, यदि ब्याज दरों में कटौती की संभावना बनती है तो गोल्ड की मांग बढ़ सकती है और कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

किन संकेतकों पर रखें नजर?

ब्रोकरेज का कहना है कि आने वाले महीनों में निवेशकों को इन प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर ध्यान देना चाहिए—

  • अमेरिका की महंगाई के आंकड़े
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले
  • वैश्विक लिक्विडिटी की स्थिति
  • केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद
  • गोल्ड ETF में निवेश का रुझान

चांदी को लेकर क्या है राय?

रिपोर्ट के अनुसार, चांदी की कीमतों का व्यवहार सोने से अलग होता है। चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री में भी बड़े पैमाने पर होता है। यही वजह है कि इसकी कीमतें औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, निवेशकों की भागीदारी और ब्याज दरों के आधार पर अधिक उतार-चढ़ाव दिखाती हैं।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

MOFSL का मानना है कि लंबी अवधि में सोना और चांदी दोनों ही पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) लाने के लिए अच्छे विकल्प बने रहेंगे। हालांकि, निवेशकों को बाजार की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। अनुशासित तरीके से नियमित निवेश करने और महंगाई, ब्याज दरों तथा केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखने से बेहतर निवेश निर्णय लिए जा सकते हैं।

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