कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) से जुड़े कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। मौजूदा नियमों के तहत ईपीएस के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन राशि 1,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है। हालांकि, पेंशनभोगी लंबे समय से इसे बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। सरकार इस मांग पर विचार कर रही है।
इसके अलावा, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में पेंशन की गणना के लिए लागू वेतन सीमा को बढ़ाने के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल यह सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की योजना है। अगर केंद्रीय कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जा सकता है।
इस बदलाव के बाद 15,001 रुपये से 25,000 रुपये तक बेसिक वेतन और डीए पाने वाले कर्मचारियों को भी पेंशन गणना के दायरे में बेहतर लाभ मिल सकता है। सरकार का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, ईपीएफओ प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और स्टार्टअप सेक्टर को भी इसके दायरे में लाना है।
न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग तेज
ईपीएस के तहत साल 2014 से न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये तय है। हालांकि, पेंशनर्स संगठन और राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) लगातार इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
इन संगठनों की मांग है कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह किया जाए और इसे महंगाई भत्ते (DA) से भी जोड़ा जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच पेंशनभोगियों को राहत मिल सके। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कैसे होती है EPS पेंशन की गणना?
कर्मचारी को मिलने वाली पेंशन कई बातों पर निर्भर करती है, जिसमें नौकरी की अवधि, बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) शामिल हैं। EPFO के अनुसार पेंशन निकालने का फॉर्मूला इस प्रकार है:
पेंशन = (पेंशन योग्य सेवा अवधि × पेंशन योग्य वेतन) / 70
वर्तमान नियमों के अनुसार पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति माह तय है। यानी अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन और डीए मिलाकर 50,000 रुपये भी है, तो सामान्य स्थिति में पेंशन की गणना के लिए केवल 15,000 रुपये तक की राशि ही मानी जाएगी।
हालांकि, जिन कर्मचारियों ने उच्च पेंशन विकल्प (Higher Pension Option) चुना है, उनके लिए नियम अलग हो सकते हैं।
स्टार्टअप कंपनियों पर भी लागू होंगे नियम
EPFO के नियमों के अनुसार, 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए EPFO में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। इसके तहत काम करने वाले कर्मचारियों को पेंशन पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
EPS पेंशन के लिए कर्मचारी को कम से कम 10 साल की अंशदायी सेवा पूरी करनी होती है। इसके बाद 58 वर्ष की उम्र पूरी होने पर कर्मचारी नियमित मासिक पेंशन प्राप्त करने के योग्य हो जाता है।
वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा
अगर सरकार वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों को भविष्य में अधिक पेंशन लाभ मिल सकता है। इससे खासतौर पर उन कर्मचारियों को फायदा होगा जिनकी सैलरी मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा से अधिक है, लेकिन वे अभी पेंशन गणना के सीमित दायरे में आते हैं।