शेयर बाजार में एक पुरानी कहावत है—जब बाजार में डर सबसे ज्यादा हो, तब अवसर सबसे बड़ा होता है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने हाल ही में इसी रणनीति पर चलते हुए ऐसा कदम उठाया, जिसने उसे महज 35 दिनों में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का जबरदस्त फायदा दिलाया।
AI को लेकर बाजार में था भारी डर
कुछ समय पहले निवेशकों के बीच यह आशंका तेजी से फैल गई थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। इस डर के कारण आईटी सेक्टर के शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिली और कई निवेशकों ने जल्दबाजी में अपने निवेश निकाल लिए।
हालांकि, जहां अधिकांश निवेशक घबराकर शेयर बेच रहे थे, वहीं एलआईसी ने इस गिरावट को निवेश के अवसर के रूप में देखा और प्रमुख आईटी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला किया।
सिर्फ 35 दिनों में 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का फायदा
एलआईसी की इस रणनीति का असर बेहद तेजी से देखने को मिला। जून 2026 के अंत तक टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में उसकी कुल हिस्सेदारी की बाजार कीमत करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं 4 अगस्त तक यही वैल्यू बढ़कर 1.26 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। यानी कंपनी को लगभग 21,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिला।
किन कंपनियों से हुआ सबसे ज्यादा मुनाफा?
सबसे बड़ा फायदा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से मिला, जहां एलआईसी के निवेश का मूल्य लगभग 8,306 करोड़ रुपये बढ़कर 48,926 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वहीं इंफोसिस में निवेश की वैल्यू करीब 7,213 करोड़ रुपये बढ़कर 51,117 करोड़ रुपये हो गई। इसके अलावा एचसीएल टेक्नोलॉजीज में एलआईसी की हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 5,513 करोड़ रुपये बढ़कर 26,306 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
गिरावट के दौरान बढ़ाई थी हिस्सेदारी
यह मुनाफा किसी संयोग का परिणाम नहीं था। जून तिमाही के दौरान एलआईसी ने योजनाबद्ध तरीके से आईटी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई थी। कंपनी ने इंफोसिस के करीब 60 लाख शेयर, एचसीएल टेक के लगभग 47 लाख शेयर और टीसीएस के 1.45 लाख शेयर खरीदे थे।
इस फैसले का फायदा तब मिला, जब बाजार में आईटी शेयरों में तेजी लौट आई।
AI का डर ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया
जनरेटिव एआई को लेकर बाजार में यह धारणा बन गई थी कि इससे पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों की मांग कम हो जाएगी। इसी वजह से कई आईटी शेयर दबाव में आ गए थे।
लेकिन समय के साथ यह डर कमजोर पड़ने लगा और जून के आखिर से निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 19% की तेजी दर्ज की गई। इससे आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली और एलआईसी के निवेश का मूल्य तेजी से बढ़ गया।
सिर्फ मजबूत कंपनियों पर लगाया दांव
एलआईसी ने पूरे आईटी सेक्टर में अंधाधुंध निवेश नहीं किया, बल्कि चुनिंदा कंपनियों को प्राथमिकता दी। कंपनी ने परसिस्टेंट सिस्टम्स के लगभग 7.60 लाख शेयर और कोफोर्ज के करीब 1.80 लाख शेयर भी खरीदे।
दूसरी ओर, जहां जोखिम अधिक नजर आया, वहां एलआईसी ने अपनी हिस्सेदारी घटा दी। कंपनी ने विप्रो के करीब 1.40 करोड़ शेयर, टेक महिंद्रा के 31.54 लाख शेयर और ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज के लगभग 2.35 लाख शेयर बेच दिए।
क्या सीख मिलती है?
एलआईसी की यह रणनीति दिखाती है कि बाजार में डर और अनिश्चितता के दौरान भी मजबूत कंपनियों में सोच-समझकर किया गया निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है। हालांकि, हर निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश लक्ष्य अलग होते हैं, इसलिए किसी भी फैसले से पहले पूरी रिसर्च और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे निवेश संबंधी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।