इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR का नाम आते ही अक्सर नौकरीपेशा लोगों या कारोबारियों का ख्याल आता है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि सिर्फ नौकरी या बिजनेस करने वालों को ही ITR दाखिल करना पड़े। अगर कोई गृहिणी नौकरी नहीं करती, लेकिन उसके नाम पर ब्याज, किराये या निवेश से आय हो रही है, तो उस पर भी इनकम टैक्स के नियम लागू हो सकते हैं।
क्या हर हाउसवाइफ को ITR भरना जरूरी है?
किसी गृहिणी के लिए ITR दाखिल करना जरूरी है या नहीं, यह उसकी कुल आय और उस पर लागू टैक्स नियमों पर निर्भर करता है। अगर उसकी सालाना टैक्सेबल इनकम संबंधित बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट के भीतर है, तो सामान्य तौर पर ITR भरना अनिवार्य नहीं होता।
60 साल से कम उम्र के करदाताओं के लिए नई टैक्स व्यवस्था में बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट 4 लाख रुपये है, जबकि पुरानी टैक्स व्यवस्था में यह सीमा 2.5 लाख रुपये है। हालांकि, ITR दाखिल करने की अनिवार्यता केवल इनकम लिमिट से ही तय नहीं होती; कुछ अन्य परिस्थितियों में भी रिटर्न भरना जरूरी हो सकता है।
गृहिणी की कमाई के कौन-कौन से स्रोत हो सकते हैं?
नौकरी नहीं करने के बावजूद किसी महिला की आय कई स्रोतों से हो सकती है। उदाहरण के लिए:
- सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज
- FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट से प्राप्त ब्याज
- मकान या दूसरी संपत्ति से मिलने वाला किराया
- शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश से होने वाली आय
- दूसरे टैक्सेबल स्रोतों से प्राप्त रकम
इसलिए सिर्फ यह तथ्य कि महिला के पास नौकरी नहीं है, यह साबित नहीं करता कि उसकी कोई टैक्सेबल इनकम नहीं है।
पति से मिले पैसों पर क्या लगेगा टैक्स?
अगर पति घरेलू खर्च या परिवार की जरूरतों के लिए पत्नी के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करता है, तो केवल रकम मिलने से वह सामान्य तौर पर पत्नी की कमाई नहीं बन जाती। हालांकि, उस रकम को निवेश करके अगर ब्याज या दूसरी आय हासिल होती है, तो उस आय पर अलग टैक्स नियम लागू हो सकते हैं।
पत्नी के नाम FD होने पर ब्याज पर टैक्स
अगर किसी गृहिणी के नाम पर FD है, तो उससे मिलने वाला ब्याज उसकी आय में शामिल हो सकता है और लागू नियमों के अनुसार उस पर टैक्स देनदारी बन सकती है।
वहीं, अगर पति ने अपने पैसे से पत्नी के नाम पर निवेश कराया है, तो स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे मामलों में क्लबिंग ऑफ इनकम के नियम लागू हो सकते हैं और निवेश से होने वाली आय को कुछ परिस्थितियों में पति की आय में जोड़ा जा सकता है।
गिफ्ट मिलने पर कब देना पड़ सकता है टैक्स?
रिश्तेदारों से मिलने वाले कई तरह के उपहारों पर टैक्स छूट का प्रावधान है। दूसरी ओर, गैर-रिश्तेदारों से एक वित्त वर्ष में प्राप्त कुल 50,000 रुपये से अधिक के कुछ गिफ्ट टैक्स के दायरे में आ सकते हैं।
इसलिए किसी बड़े गिफ्ट को मिलने पर यह देखना जरूरी है कि वह किससे मिला है और उस पर आयकर कानून के कौन से नियम लागू होते हैं।
अपनी टैक्सेबल इनकम कैसे पता करें?
टैक्सेबल इनकम का अनुमान लगाने के लिए गृहिणी को सबसे पहले अपने सभी आय स्रोतों की जानकारी जुटानी चाहिए। इसमें बैंक ब्याज, FD का ब्याज, किराये से प्राप्त रकम और निवेश से होने वाली टैक्सेबल आय शामिल हो सकती है।
इसके बाद लागू नियमों के तहत उपलब्ध कटौती और छूट को ध्यान में रखा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर PPF, NSC, हेल्थ इंश्योरेंस और पात्र डोनेशन जैसी मदों पर कुछ परिस्थितियों में टैक्स लाभ मिल सकता है।
Bottom Line
गृहिणी के नाम पर सैलरी नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि उसे कभी ITR दाखिल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर उसके पास ब्याज, किराया, निवेश या किसी अन्य स्रोत से आय है, तो उसकी कुल आय और लागू टैक्स नियमों के आधार पर ITR की जरूरत तय होगी।
इसलिए ITR भरने से पहले अपनी सभी आय, निवेश, कटौती और टैक्स व्यवस्था की सही तरीके से जांच करना जरूरी है। टैक्स नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए मौजूदा वित्त वर्ष के नियमों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लेना चाहिए।