नई दिल्ली। नौकरीपेशा माता-पिता के लिए ऑफिस की जिम्मेदारियों के साथ छोटे बच्चों की देखभाल करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए नए लेबर कोड में वर्कप्लेस पर बच्चों की देखभाल यानी क्रेच सुविधा से जुड़े प्रावधानों को अधिक व्यापक बनाया गया है। इन नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को काम और परिवार के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद करना है।
50 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों में क्रेच सुविधा जरूरी
सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 (COSS) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड (OSHWC), 2020) के प्रावधानों के अनुसार, जिन प्रतिष्ठानों में 50 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, वहां छह वर्ष से कम उम्र के कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रेच सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है।
नियमों के मुताबिक क्रेच की सुविधा ऑफिस या कार्यस्थल से एक किलोमीटर के दायरे में होनी चाहिए। कंपनियां इस सुविधा को खुद संचालित कर सकती हैं या फिर आसपास के अन्य संस्थानों के साथ मिलकर कॉमन क्रेच सेंटर भी शुरू कर सकती हैं।
क्या क्रेच सुविधा सिर्फ महिलाओं के लिए है?
इस व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि क्रेच सुविधा को केवल महिला कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखा गया है।
16 मार्च 2026 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, OSHWC कोड के तहत क्रेच सुविधा सभी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए, भले ही कर्मचारी का जेंडर कुछ भी हो।
हालांकि, सोशल सिक्योरिटी कोड के कुछ हिस्सों में ‘महिला’, ‘विधुर’ और ‘सिंगल पेरेंट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में इंडस्ट्री की ओर से इन प्रावधानों को और अधिक जेंडर-न्यूट्रल बनाने की मांग भी सामने आती रही है।
क्रेच की सुविधा नहीं तो मिल सकता है भत्ता
अगर किसी कंपनी के लिए अपने स्तर पर क्रेच उपलब्ध कराना संभव नहीं है, तो कर्मचारियों की सहमति से क्रेच अलाउंस या नकद भत्ता देने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
ऐसे मामले में भत्ता कम से कम ₹500 प्रति बच्चा प्रति माह हो सकता है। यह सुविधा सामान्य तौर पर अधिकतम दो बच्चों तक लागू होगी। हालांकि, जुड़वां बच्चों जैसी परिस्थितियों में अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं।
कामकाजी माताओं को मिलेंगी अतिरिक्त सुविधाएं
क्रेच से संबंधित व्यवस्था के तहत कामकाजी माताओं के लिए कुछ अतिरिक्त सुविधाओं का भी प्रावधान है। इनमें शामिल हैं:
- कर्मचारी दिन में चार बार तक क्रेच विजिट कर सकती हैं, जिसमें आराम का समय भी शामिल है।
- बच्चे के 15 महीने की उम्र पूरी होने तक रोजाना दो नर्सिंग ब्रेक मिल सकते हैं।
- प्रत्येक नर्सिंग ब्रेक की अवधि 15 मिनट तक हो सकती है।
- क्रेच तक आने-जाने के लिए 15 मिनट तक का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।
क्रेच में सुरक्षा और स्वच्छता के नियम भी जरूरी
कंपनियों की जिम्मेदारी केवल बच्चों के लिए जगह उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। क्रेच में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और साफ-सफाई का भी उचित ध्यान रखना जरूरी है।
क्रेच सुविधा में CCTV निगरानी, कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन, पर्याप्त हवा और पानी की व्यवस्था, फर्स्ट-एड सुविधा और बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित स्थान जैसी व्यवस्थाएं शामिल होनी चाहिए।
कुल मिलाकर, नए लेबर कोड से जुड़ी क्रेच व्यवस्था का उद्देश्य नौकरीपेशा माता-पिता को अपने बच्चों की देखभाल के लिए बेहतर और सुरक्षित सुविधा उपलब्ध कराना है। साथ ही, कार्यस्थल पर ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई है जिससे कर्मचारी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ पारिवारिक जरूरतों को भी बेहतर तरीके से संभाल सकें।