नई दिल्ली: देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच 29 जून 2026 को आम लोगों की जेब पर एक साथ कई मोर्चों से दबाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में फिर तेजी आने से ईंधन की लागत बढ़ने की आशंका गहरा गई है। वहीं, घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल पहले से ही ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं और रसोई गैस (LPG) की कीमतें भी लोगों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं। इसका असर यात्रा से लेकर रसोई और रोजमर्रा की जरूरतों तक साफ दिखाई दे रहा है।
बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी भी ऊंचे
देश के अधिकांश महानगरों में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹102 प्रति लीटर और डीजल करीब ₹89 प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल ₹111 प्रति लीटर से अधिक और डीजल लगभग ₹97 प्रति लीटर के आसपास है। कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में भी पेट्रोल ₹107 से ₹113 प्रति लीटर के बीच और डीजल ₹94 से ₹99 प्रति लीटर तक बना हुआ है। भले ही रोजाना कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हो रहा, लेकिन मौजूदा ऊंचे दाम आम लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
कच्चे तेल की तेजी से बढ़ सकती है मुश्किल
वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में हालिया उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तेजी जारी रही तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
LPG सिलेंडर भी बना बजट पर बोझ
रसोई गैस की कीमतें भी आम परिवारों को राहत नहीं दे रही हैं। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत करीब ₹940 से ₹950 के बीच बनी हुई है। हाल के दिनों में इसमें हुई बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ा है। वहीं, 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत ₹3000 से अधिक बनी हुई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस की लागत बढ़ रही है। इसका असर आगे चलकर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
आखिर क्यों कम नहीं हो रही महंगाई?
ईंधन और गैस की ऊंची कीमतों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स तथा सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां कीमतों को प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि वैश्विक बाजार में थोड़ी राहत मिलने के बावजूद उपभोक्ताओं को तुरंत फायदा नहीं मिल पाता।
आम लोगों की जेब पर सीधा असर
पेट्रोल और डीजल महंगे होने से निजी वाहन चलाने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन का खर्च भी बढ़ जाता है। वहीं, LPG सिलेंडर की ऊंची कीमतें घर के किचन का बजट बिगाड़ रही हैं। इसके अलावा, परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, राशन, दूध और अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो जाते हैं। यानी ईंधन की महंगाई का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोजमर्रा की पूरी जीवनशैली पर पड़ता है।