घरों में रखा सोना लोग धड़ाधड़ बेच रहे, पिछले साल की तुलना में 43% की बढ़ोतरी—जानिए इसके पीछे की वजह

Saroj kanwar
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नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों और आम ग्राहकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून महीने के दौरान सोना करीब 15,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी की कीमतों में लगभग 45,000 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

इसी आशंका के चलते देशभर में लोग अपने पुराने सोने के गहने बेचकर नकद पैसा हासिल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 के बीच भारतीय ग्राहकों ने करीब 50 टन पुराना सोना बाजार में बेचा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक है।

₹1.2 लाख तक आ सकते हैं सोने के दाम

फिलहाल सोना करीब 1.4 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि बाजार में यह चर्चा तेज है कि इसकी कीमतें आगे चलकर 1.2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल सकती हैं। यही कारण है कि कई ग्राहक पुराने गहनों को एक्सचेंज करने के बजाय सीधे बेचकर मुनाफा कमाने का फैसला कर रहे हैं।

IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि भारतीय ग्राहक ऊंचे भाव का फायदा उठाते हुए अपने पुराने सोने को नकदी में बदल रहे हैं। उनका मानना है कि यदि कीमतों में और गिरावट आती है तो यह ट्रेंड कुछ समय तक जारी रह सकता है।

रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसली कीमतें

मेहता के अनुसार, इस साल की शुरुआत में सोने ने करीब 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन अब यह लगभग 1.4 लाख रुपये तक आ चुका है। बाजार में आगे और कमजोरी की संभावना को देखते हुए लोग समय रहते सोना बेचने में ही फायदा समझ रहे हैं।

इस बदलते रुझान का सबसे बड़ा लाभ देश की ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को मिल रहा है। पहले जहां लोग वर्षों तक सोना घरों में संभालकर रखते थे, वहीं अब इसे एक मजबूत वित्तीय संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है, जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से नकदी में बदला जा सकता है।

गोल्ड रीसाइक्लिंग कारोबार को मिला बड़ा फायदा

इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने सोने की बढ़ती बिक्री से रिफाइनिंग और ज्वैलरी कंपनियों को लगातार कच्चा माल मिल रहा है। इसी वजह से गोल्ड खरीदने वाली कंपनियों के कारोबार में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

मुथूट एक्सिम ने बताया कि उसके देशभर में मौजूद 100 से अधिक गोल्ड पॉइंट्स पर पुराने सोने की खरीद में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कंपनी के सीईओ केयूर शाह के मुताबिक, ग्राहक अब पारदर्शी और संगठित प्रक्रिया के जरिए अपने सोने को नकदी में बदलने में पहले से ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं। इससे ग्राहकों को बेहतर कीमत मिलती है और पुराना सोना दोबारा शुद्ध कर बाजार में इस्तेमाल होने लगता है।

कैसे होता है पुराने सोने का दोबारा इस्तेमाल?

मुथूट एक्सिम जैसी कंपनियां ग्राहकों से पुराना सोना खरीदकर उसे रिफाइन करती हैं और फिर 24 कैरेट शुद्ध सोना तैयार करती हैं। इसके बाद इस शुद्ध सोने की सप्लाई ज्वैलरी निर्माता और गोल्ड कॉइन बनाने वाली कंपनियों को की जाती है।

इस प्रक्रिया से नए सोने की खदानों पर निर्भरता कम होती है और देश के भीतर सोने की उपलब्धता भी बढ़ती है।

भारत में गोल्ड आयात पर कम हो सकती है निर्भरता

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। पिछले वित्त वर्ष में देश ने लगभग 72.4 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया था, जबकि रीसाइक्लिंग के जरिए करीब 125 से 150 टन सोना बाजार में वापस आया।

उद्योग जगत का अनुमान है कि यदि मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो वर्ष 2026 में रीसाइक्लिंग के जरिए मिलने वाला सोना बढ़कर 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है।

भारतीय घरों में है दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड स्टॉक

अनुमान के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास करीब 30,000 टन सोना मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विशाल भंडार का बड़ा हिस्सा संगठित तरीके से रीसाइक्लिंग में आए तो देश की आयात पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।

इसी दिशा में Augmont भी अपने Gold For All नेटवर्क का विस्तार कर चुका है और कई राज्यों में 114 सेंटर शुरू किए हैं। कंपनी के निदेशक केतन कोठारी का कहना है कि दुनिया में सबसे अधिक घरेलू सोना भारत के पास है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अभी भी घरों में निष्क्रिय पड़ा हुआ है। यदि इसे व्यवस्थित रूप से बाजार में लाया जाए तो इससे ग्राहकों के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।

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