अयोध्या: राम मंदिर की दान पेटियों से कथित चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। इस बीच 5 जून का एक CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। दावा किया जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट को चोरी की जानकारी पहले से थी, लेकिन समय रहते न तो शिकायत दर्ज कराई गई और न ही कानूनी कार्रवाई की गई। इसी वजह से ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय बंसल की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस मामले में जांच अभी जारी है और किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
5 जून के CCTV फुटेज से क्या सामने आया?
सामने आए करीब 24 सेकेंड के CCTV वीडियो में एक सफेद रंग की गाड़ी और चार लोग दिखाई दे रहे हैं। दावा है कि इनमें से एक व्यक्ति अविनाश शुक्ला है, जबकि दो पुलिसकर्मी भी वीडियो में नजर आ रहे हैं। एक अन्य व्यक्ति के हाथ में काले रंग का बैग दिखाई देता है, जिसमें कथित तौर पर नकदी होने का दावा किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, 5 जून को ट्रस्ट के कुछ प्रतिनिधि और पुलिसकर्मी अविनाश शुक्ला के ठिकाने पर पहुंचे थे, जहां से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। इसके बावजूद उस समय न तो ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई और न ही पुलिस ने तत्काल कोई मामला दर्ज किया।
जांच में उठ रहे बड़े सवाल
मामले में अब कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं—
- यदि 5 जून को नकदी बरामद हो गई थी, तो इसकी सूचना सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
- बरामदगी के बावजूद तत्काल FIR क्यों दर्ज नहीं हुई?
- ट्रस्ट और पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में देरी क्यों की?
- क्या चोरी की जानकारी पहले से होने के बावजूद मामले को दबाने की कोशिश की गई?
इन सवालों के जवाब अब SIT की जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
7 जून को सामने आया मामला
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा पहली बार 7 जून को सार्वजनिक चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए चोरी का आरोप लगाया। उसी दिन ट्रस्ट की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि ऑडिट में कोई बड़ी अनियमितता सामने नहीं आई है।
हालांकि बाद में मामला लगातार तूल पकड़ता गया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
25 जून को दर्ज हुई FIR
SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई, जिसमें आठ नामजद आरोपियों सहित अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। उसी दिन सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और 26 जून को उन्हें जेल भेज दिया गया।
आरोपियों के घरों पर छापेमारी
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस और SIT ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी की। इस दौरान परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए गए और कई स्थानों से ज्वेलरी, दस्तावेज तथा अन्य सामान बरामद किए गए।
टिन्नू यादव उर्फ रामशंकर यादव से जुड़े लोगों के यहां भी तलाशी ली गई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित चोरी की रकम कहां-कहां निवेश की गई, कितनी संपत्तियां खरीदी गईं और किस प्रकार धन का उपयोग किया गया।
आर्थिक जांच में सामने आए नए संकेत
सूत्रों के अनुसार SIT को जांच के दौरान कई आरोपियों की आर्थिक स्थिति में असामान्य बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। कुछ लोगों की संपत्ति में कई गुना वृद्धि होने की जानकारी सामने आई है। जमीन, होटल और अन्य निवेशों की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां मनी ट्रेल खंगाल रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित चोरी की रकम किन-किन माध्यमों से खर्च या निवेश की गई।
डिजिटल सबूतों की भी जांच
SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपियों ने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल डेटा हटाने की कोशिश की। कुछ मोबाइल फोन फॉर्मेट किए जाने की भी बात सामने आई है।
अब पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में
चढ़ावा चोरी के मामले के बाद राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। सूत्रों के मुताबिक SIT कंट्रोल रूम, सुरक्षा कर्मियों, PAC तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर भी नजर
सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों को अभी तक कोई क्लीनचिट नहीं दी गई है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि चोरी की जानकारी किस स्तर तक थी और किसने क्या भूमिका निभाई।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। विपक्ष सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगा रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर समाजवादी पार्टी भाजपा पर निशाना साध रही है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विपक्ष पर पलटवार कर रहे हैं।
जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष का इंतजार
फिलहाल SIT की जांच जारी है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन, डिजिटल सबूत, संपत्तियों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। मामले में कई दावे और आरोप सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।