भारत में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का सबसे मजबूत साधन माना जाता है। मुश्किल समय में यही जमा पूंजी परिवारों के काम आती है। हालांकि इस समय सर्राफा बाजार में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। सोने की ऊंची कीमतों के बीच बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और लॉकरों में रखा पुराना सोना बेचकर नकद पैसा हासिल कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तिमाही में भारतीयों ने करीब 50 टन पुराना सोना बेचकर रिकॉर्ड स्तर पर मुनाफावसूली की है।
नया गहना नहीं, सीधे बैंक खाते में पैसा चाहते हैं ग्राहक
आमतौर पर भारत में लोग पुरानी ज्वेलरी देकर नई ज्वेलरी बनवाना पसंद करते हैं, खासकर शादी और त्योहारों के दौरान। लेकिन इस बार ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है।
ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि अब अधिकांश ग्राहक पुराने गहनों के बदले नई डिजाइन नहीं चुन रहे, बल्कि सोने की शुद्धता की जांच करवाकर सीधे कैश या बैंक ट्रांसफर लेना पसंद कर रहे हैं। पिछले साल की तुलना में पुराना सोना बेचने वाले ग्राहकों की संख्या में करीब 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है गोल्ड मार्केट क्रैश का डर?
सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी के बाद अब निवेशकों के बीच गिरावट की आशंका बढ़ गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद गोल्ड की कीमतें दबाव में आ सकती हैं।
फिलहाल सोना करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां बदलीं तो कीमतें 1.20 लाख रुपये तक भी आ सकती हैं।
मध्य पूर्व में जारी तनाव, केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में बदलाव और वैश्विक निवेशकों की रणनीति को देखते हुए लोगों को डर है कि अगर कीमतों में बड़ी गिरावट आई तो मौजूदा मुनाफा हाथ से निकल सकता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग अभी सोना बेचकर लाभ सुरक्षित करना चाहते हैं।
ज्वेलरी कारोबार पर क्या पड़ रहा है असर?
पुराने सोने की बिक्री बढ़ने से ज्वेलर्स के पास रीसाइक्लिंग के लिए पर्याप्त स्टॉक पहुंच रहा है, लेकिन नई ज्वेलरी की मांग कमजोर पड़ गई है। शादी-ब्याह का सीजन होने के बावजूद ग्राहक भारी खरीदारी से बच रहे हैं।
यदि आने वाले महीनों में भी इसी तरह बड़ी मात्रा में पुराना सोना बाजार में आता रहा, तो घरेलू सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
गोल्ड रीसाइक्लिंग से मजबूत होगा घरेलू बाजार
मुथूट एक्सिम के CEO केयूर शाह के अनुसार, अब ग्राहक संगठित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म के जरिए अपना पुराना सोना बेचने में ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिलती है और सोने का दोबारा उपयोग भी संभव हो पाता है।
कंपनी ग्राहकों से पुराना सोना खरीदकर उसे रिफाइन करती है और 24 कैरेट शुद्ध सोना तैयार कर ज्वेलरी निर्माताओं और सिक्का बनाने वाली कंपनियों को उपलब्ध कराती है। इससे नई खदानों पर निर्भरता घटती है और घरेलू बाजार में सोने की उपलब्धता बढ़ती है।
गोल्ड इंपोर्ट कम करने में मिलेगी मदद
भारत अभी भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। वित्त वर्ष 2026 में देश ने करीब 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया। वहीं 2025 में अनुमानित 125 से 150 टन सोना रीसाइक्लिंग के जरिए बाजार में वापस आया था।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो 2026 में रीसाइक्लिंग का आंकड़ा 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है।
अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास लगभग 30,000 टन सोना मौजूद है। ऐसे में ऑर्गनाइज्ड गोल्ड रीसाइक्लिंग न केवल इस निष्क्रिय संपत्ति को उपयोग में ला सकती है, बल्कि देश की आयात पर निर्भरता भी काफी हद तक कम कर सकती है।
ऑर्गनाइज्ड गोल्ड रीसाइक्लिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार
ऑगमॉन्ट ने अपने ‘गोल्ड फॉर ऑल’ नेटवर्क का विस्तार करते हुए कई राज्यों में 114 नए सेंटर शुरू किए हैं। यहां ग्राहक अपने पुराने सोने का मूल्यांकन, रीसाइक्लिंग और उचित कीमत पर बिक्री कर सकते हैं।
कंपनी के डायरेक्टर केतन कोठारी का कहना है कि दुनिया में सबसे ज्यादा घरेलू सोना भारत के पास है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा वर्षों से बिना इस्तेमाल के घरों में पड़ा रहता है। यदि इसे संगठित तरीके से रीसाइक्लिंग सिस्टम में लाया जाए, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और गोल्ड इंडस्ट्री दोनों को बड़ा फायदा मिल सकता है.