कुछ साल पहले तक कर्व्ड डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन को प्रीमियम डिजाइन और भविष्य की तकनीक का प्रतीक माना जाता था। लेकिन समय के साथ यूजर्स के अनुभव ने इसकी कमियों को सामने ला दिया और यही वजह है कि अब यह ट्रेंड तेजी से पीछे छूटता नजर आ रहा है।
किनारों के टच से बढ़ती परेशानी
कर्व्ड स्क्रीन का सबसे बड़ा दिक्कत भरा पहलू इसका अनचाहा टच रिस्पॉन्स था। फोन को सामान्य तरीके से पकड़ने पर भी कई बार उंगलियां या हथेली स्क्रीन के घुमावदार किनारों को छू लेती थीं। इससे कई बार बिना इच्छा के ऐप्स खुल जाते, गलत कमांड चल जाते या ऐसे फीचर्स एक्टिव हो जाते जिनकी जरूरत ही नहीं होती थी। रोजमर्रा के इस्तेमाल में यह समस्या यूजर्स के लिए काफी परेशान करने वाली साबित हुई।
तेज रोशनी और धूप में कमजोर अनुभव
कर्व्ड डिस्प्ले की एक और बड़ी कमी ग्लेयर यानी रोशनी का परावर्तन था। जब यूजर तेज धूप या मजबूत लाइट में फोन इस्तेमाल करता था, तो स्क्रीन के मुड़े हुए हिस्सों पर रोशनी रिफ्लेक्ट होने लगती थी। इसकी वजह से डिस्प्ले की विजिबिलिटी प्रभावित होती थी और कंटेंट ठीक से देखना मुश्किल हो जाता था। आउटडोर उपयोग के दौरान यह समस्या और ज्यादा स्पष्ट रूप से महसूस की जाती थी।
क्यों बदल गया कर्व्ड स्क्रीन का ट्रेंड?
इन तकनीकी खामियों और यूजर अनुभव से जुड़ी समस्याओं ने धीरे-धीरे कर्व्ड डिस्प्ले की लोकप्रियता को कम कर दिया। कंपनियां अब ज्यादा प्रैक्टिकल और यूजर-फ्रेंडली फ्लैट डिस्प्ले डिजाइन की ओर वापस लौटती दिख रही हैं।
नतीजा: कर्व्ड स्क्रीन भले ही एक समय पर स्टाइल और इनोवेशन का प्रतीक रही हो, लेकिन इसके उपयोग में आने वाली परेशानियों ने इसके ट्रेंड को लगभग खत्म कर दिया है।