Vat Saptami 2026: आज रखा जाएगा वट सप्तमी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा की संपूर्ण विधि

Saroj kanwar
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Vat Saptami 2026: हिंदू धर्म में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वृक्ष में त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास होता है। कहा जाता है कि इसकी शाखाओं में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और जड़ों में भगवान शिव विराजमान रहते हैं। यही कारण है कि वट वृक्ष को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है।

ज्येष्ठ माह में इस वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए वट सप्तमी व्रत रखती हैं। इस पर्व को कई स्थानों पर बड़ साते के नाम से भी जाना जाता है।

वट सप्तमी 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर वट सप्तमी का व्रत किया जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत रविवार, 21 जून को मनाया जा रहा है।

इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास होने के कारण इसकी अवधि सामान्य से अधिक रही, जिससे कई लोगों के बीच व्रत की सही तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। 15 जून को ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या समाप्त होने के बाद शुद्ध ज्येष्ठ माह का शुक्ल पक्ष आरंभ हुआ, जिसके चलते वट सप्तमी का व्रत 21 जून को पड़ रहा है।

वट सप्तमी 2026 के शुभ मुहूर्त

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 5:30 बजे से 9:45 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक

इन शुभ समयों में वट वृक्ष की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

वट सप्तमी व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों में वट वृक्ष को दीर्घायु, स्थिरता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि वट सप्तमी के दिन श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख बना रहता है और परिवार में खुशहाली का वास होता है।

कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से घर-परिवार की समस्याएं दूर होती हैं, जीवन में सकारात्मकता आती है और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि सुहागिन महिलाएं इस दिन विशेष श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा-अर्चना करती हैं।

वट सप्तमी पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
  • निकट स्थित वट वृक्ष के पास जाकर उसकी जड़ों में जल अर्पित करें।
  • इसके बाद रोली, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप से विधिवत पूजा करें।
  • वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत या धागा लपेटते हुए परिक्रमा करें।
  • पूजा के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
  • परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की मंगल कामना करें।
  • पूजा पूर्ण होने के बाद प्रसाद वितरित करें और अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान अवश्य दें।

निष्कर्ष

वट सप्तमी का व्रत भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत न केवल पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए किया जाता है, बल्कि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने का भी प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल फल प्रदान करती है।

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