बार-बार बेहोशी को न करें नजरअंदाज, दिल और दिमाग से जुड़ी इन समस्याओं का हो सकता है संकेत

Saroj kanwar
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कभी-कभी कमजोरी, लंबे समय तक भूखे रहने, शरीर में पानी की कमी, लो ब्लड प्रेशर या तेज गर्मी के कारण व्यक्ति कुछ समय के लिए बेहोश हो सकता है। आमतौर पर ऐसी स्थिति कुछ समय बाद ठीक हो जाती है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को बार-बार बेहोशी आती है और इसके पीछे कोई स्पष्ट वजह नजर नहीं आती, तो इसे सिर्फ कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बार-बार बेहोश होने की समस्या कुछ मामलों में मस्तिष्क, हृदय या नर्वस सिस्टम से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकती है। मिर्गी, हृदय की अनियमित धड़कन, ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम की समस्या और कुछ गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में भी बेहोशी हो सकती है। इसलिए ऐसी समस्या होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

आखिर बेहोशी क्यों आती है?

मेडलाइनप्लस के मुताबिक, जब कुछ समय के लिए मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, तब व्यक्ति बेहोश हो सकता है। इस दौरान कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक होश खो सकता है।

बेहोशी के सामान्य कारणों में लंबे समय तक खड़े रहना, डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, तेज दर्द, भावनात्मक तनाव, लंबे समय तक कुछ न खाना और अचानक बैठी या लेटी स्थिति से खड़ा होना शामिल हैं।

ऐसी स्थिति को वैसोवेगल सिंकोप (Vasovagal Syncope) कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में यह गंभीर नहीं होती। हालांकि, बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार बेहोशी आना या इसके साथ दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई देना डॉक्टर से सलाह लेने का संकेत है।

इन परिस्थितियों में बेहोशी को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

मेयो क्लीनिक के अनुसार, कुछ खास परिस्थितियों में बेहोशी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकती है। अगर व्यक्ति को एक्सरसाइज करते समय बेहोशी आए, अचानक बिना किसी चेतावनी के होश चला जाए या यह समस्या बार-बार हो, तो मेडिकल जांच जरूरी है।

खास तौर पर इन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए:

  • बार-बार बेहोशी होना
  • बेहोश होने के दौरान चोट लग जाना
  • सीने में दर्द के साथ बेहोशी आना
  • दिल की धड़कन का बहुत तेज या अनियमित होना
  • परिवार में अचानक हार्ट डेथ का इतिहास होना
  • बेहोशी के बाद काफी देर तक भ्रम की स्थिति रहना
  • दौरे जैसे लक्षण दिखाई देना
  • बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस होना

ऐसे मामलों में डॉक्टर जरूरत के अनुसार न्यूरोलॉजिकल और कार्डियक जांच की सलाह दे सकते हैं।

मस्तिष्क से जुड़ी कौन-सी समस्याएं बेहोशी की वजह बन सकती हैं?

1. मिर्गी

हर बार बेहोशी का मतलब मिर्गी नहीं होता। हालांकि, कुछ प्रकार के दौरे में व्यक्ति होश खो सकता है। यदि बेहोशी के दौरान शरीर में झटके आएं, जीभ कट जाए, पेशाब निकल जाए या होश में आने के बाद काफी देर तक भ्रम बना रहे, तो डॉक्टर मिर्गी की संभावना की जांच कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में चिकित्सक जरूरत पड़ने पर EEG जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

2. स्ट्रोक या TIA

ज्यादातर स्ट्रोक के मामलों में सीधे बेहोशी नहीं होती, लेकिन मस्तिष्क के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों में रक्त प्रवाह प्रभावित होने पर चेतना प्रभावित हो सकती है।

यदि बेहोशी या अचानक कमजोरी के साथ चेहरा टेढ़ा होना, बोलने में परेशानी, हाथ-पैर में कमजोरी या शरीर के किसी हिस्से में नियंत्रण कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए।

3. ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम की समस्या

शरीर के ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और दूसरी अनैच्छिक गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम में गड़बड़ी होने पर भी चक्कर और बेहोशी की समस्या हो सकती है।

कुछ दुर्लभ स्थितियों में मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी चेतना प्रभावित कर सकती हैं। यदि बेहोशी के साथ लगातार सिरदर्द, उल्टी या देखने में परेशानी जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

हृदय की इन समस्याओं से भी हो सकती है बेहोशी

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, कार्डियक सिंकोप बेहोशी का एक गंभीर कारण हो सकता है। हृदय की धड़कन में गड़बड़ी, हार्ट वाल्व से जुड़ी बीमारी और कार्डियोमायोपैथी जैसी स्थितियां बेहोशी का कारण बन सकती हैं।

खासकर अगर बेहोशी अचानक हो और उसके साथ सीने में दर्द, धड़कन का अनियमित होना या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण मौजूद हों, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

अगर बेहोशी एक बार किसी स्पष्ट कारण जैसे तेज गर्मी, डिहाइड्रेशन या लंबे समय तक खड़े रहने के बाद हुई है, तब भी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। लेकिन बार-बार बेहोशी होना, बिना किसी कारण के अचानक होश खोना या बेहोशी के साथ दूसरे गंभीर लक्षण दिखाई देना सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर कारण जानने के लिए मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड प्रेशर, हार्ट रिदम और जरूरत के अनुसार न्यूरोलॉजिकल जांच कर सकते हैं। समय पर जांच कराने से समस्या के वास्तविक कारण का पता लगाने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

बार-बार बेहोशी को केवल कमजोरी, थकान या लो ब्लड प्रेशर मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई बार इसके पीछे हृदय या नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या हो सकती है। खासकर सीने में दर्द, अनियमित धड़कन, दौरे, बोलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण साथ हों, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

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