सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन MCX पर दोनों ही धातुओं में अब भी मजबूत तेजी का संकेत बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोना ₹1,70,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है, जबकि चांदी ₹3,00,000 प्रति किलो के स्तर को छूने की क्षमता रखती है।
इस तेजी के पीछे प्रमुख कारण इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता को माना जा रहा है, जिसने कीमतों को सपोर्ट दिया है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए ट्रेडिंग करते समय सावधानी और स्टॉप लॉस का इस्तेमाल जरूरी बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रेडिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे चलकर किसी भी गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। MCX गोल्ड वीकली चार्ट पर साइडवेज से बुलिश ट्रेंड की ओर बढ़ चुका है और हाल ही में इसने कंसोलिडेशन से ब्रेकआउट भी किया है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से भी सोने को अतिरिक्त सपोर्ट मिला है।
फिलहाल, सोने की कीमत करीब ₹1,58,800 के आसपास बनी हुई है। एनालिस्ट्स के अनुसार ₹1,54,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर बना रहता है, तो सोना आगे चलकर ₹1,70,000 तक जा सकता है। ऐसे में किसी भी गिरावट को निवेश के मौके के रूप में देखा जा रहा है।
चांदी की बात करें तो MCX सिल्वर भी वीकली चार्ट पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है और हालिया हाई को टेस्ट कर रही है। वर्तमान में इसका भाव लगभग ₹2,72,800 प्रति किलो है। इसके लिए ₹2,61,000 का सपोर्ट अहम माना जा रहा है। यदि यह स्तर कायम रहता है तो चांदी पहले ₹2,85,000 और फिर ₹3,00,000 तक पहुंच सकती है।
रणनीति के तौर पर विशेषज्ञों का सुझाव है कि सोने में मौजूदा स्तर से ₹1,70,000 का टारगेट रखा जा सकता है, जबकि स्टॉप लॉस ₹1,54,500 के आसपास रखना सुरक्षित माना जा रहा है। चांदी के लिए ₹3,00,000 का लक्ष्य संभव बताया जा रहा है, साथ ही ₹2,61,000 के पास स्टॉप लॉस लगाने की सलाह दी गई है।
लंबी अवधि के नजरिए से दोनों धातुओं का आउटलुक अभी भी सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए निवेशकों को अपनी रिस्क क्षमता के अनुसार ही फैसला लेना चाहिए और बाजार की हर अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
इसके साथ ही निवेशक अब वैश्विक घटनाक्रम—जैसे US-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतें, महंगाई के रुझान और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग व सर्विसेज PMI डेटा—पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि ये सभी फैक्टर आगे कमोडिटी मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।