नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने महंगाई भत्ता (Dearness Allowance-DA) और महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) की गणना में इस्तेमाल होने वाले मौजूदा फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था बढ़ती महंगाई और वास्तविक जीवन-यापन के खर्च को सही तरीके से नहीं दर्शाती।
अभी कैसे तय होता है DA और DR?
फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के DA और DR की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के 12 महीने के औसत के आधार पर की जाती है। इसी इंडेक्स के अनुसार साल में दो बार—जनवरी और जुलाई—महंगाई भत्ते में संशोधन किया जाता है।
AIDEF की क्या है मांग?
AIDEF का कहना है कि मौजूदा AICPI-IW इंडेक्स आम सरकारी कर्मचारियों के वास्तविक खर्च को पूरी तरह नहीं दर्शाता। संगठन का तर्क है कि खाद्य पदार्थ, स्वास्थ्य सेवाएं, मकान का किराया, शिक्षा, परिवहन और अन्य जरूरी खर्चों की कीमतें जिस रफ्तार से बढ़ रही हैं, उनका सही असर वर्तमान फॉर्मूले में दिखाई नहीं देता। इसलिए 8वें वेतन आयोग को ऐसा नया महंगाई सूचकांक तैयार करना चाहिए जो सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की वास्तविक उपभोग आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से दर्शा सके।
नए इंडेक्स से क्या हो सकता है फायदा?
यदि भविष्य में सरकार AIDEF के सुझाव पर विचार करती है और नया महंगाई सूचकांक लागू होता है, तो DA और DR की गणना अधिक वास्तविक महंगाई के आधार पर हो सकती है। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को बढ़ती कीमतों के अनुरूप अधिक राहत मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, फिलहाल यह केवल कर्मचारी संगठन का प्रस्ताव है और सरकार या 8वें वेतन आयोग ने इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
अभी क्या है स्थिति?
8वां वेतन आयोग फिलहाल विभिन्न कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। DA और DR के फॉर्मूले में बदलाव को लेकर AIDEF का प्रस्ताव भी इन्हीं सुझावों का हिस्सा है। आयोग सभी सुझावों की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार ही लेगी।
कर्मचारियों के लिए क्या है अहम बात?
फिलहाल DA और DR की गणना पहले की तरह मौजूदा AICPI-IW आधारित फॉर्मूले से ही जारी रहेगी। जब तक सरकार किसी नए फॉर्मूले या महंगाई सूचकांक को मंजूरी नहीं देती, तब तक कर्मचारियों और पेंशनर्स को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही महंगाई भत्ता मिलता रहेगा। इसलिए अभी किसी नए फॉर्मूले को लागू मानना उचित नहीं होगा।