8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसी कड़ी में आयोग की एक टीम इन दिनों लखनऊ दौरे पर है, जहां विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनर संघों और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की जा रही हैं।
बैठकों के दौरान कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग के सामने कई अहम मांगें रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम बेसिक वेतन को बढ़ाकर 69,000 रुपये प्रति माह करने की है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये है, जिसे 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लागू किया गया था।
संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई, जीवन-यापन की लागत और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में कर्मचारियों की आय और वास्तविक जरूरतों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। इसलिए नए वेतन आयोग को वेतन संरचना में व्यापक सुधार करते हुए न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की सिफारिश करनी चाहिए।
पेंशनर संगठनों ने भी पेंशन में संशोधन और महंगाई के अनुरूप राहत बढ़ाने की मांग उठाई। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेंशन ढांचे में सुधार जरूरी है।
आयोग की टीम विभिन्न राज्यों में जाकर कर्मचारियों, पेंशनरों और संबंधित संगठनों से सुझाव जुटा रही है। इन सुझावों और मांगों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे बाद में केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों पर कितना सकारात्मक रुख अपनाता है और सरकार इन सिफारिशों को किस हद तक लागू करती है।