1947 में कितना था सोने का भाव? आज की कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

Saroj kanwar
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सोने की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। इस साल भी गोल्ड ने कई बार रिकॉर्ड स्तर को छुआ। हालांकि, फिलहाल घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आज जिस सोने की कीमत आसमान छू रही है, आजादी के समय यानी 1947 में 10 ग्राम सोने का भाव कितना था?

भारत 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस खास मौके पर अगर करीब 80 साल पहले के सोने के भाव पर नजर डालें तो इसकी कीमत सुनकर आज की पीढ़ी को यकीन करना मुश्किल हो सकता है।

1947 में 10 ग्राम सोने की कीमत कितनी थी?

आज सोने का भाव 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक पहुंच चुका है। वहीं, साल 1947 में 10 ग्राम सोना महज 88.62 रुपये में खरीदा जा सकता था। यानी करीब आठ दशकों में सोने की कीमत में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि, उस दौर की आर्थिक परिस्थितियां आज से बिल्कुल अलग थीं। लोगों की औसत आय कम थी, महंगाई का स्तर भी मौजूदा समय जैसा नहीं था और रुपये की क्रय शक्ति कहीं ज्यादा थी। समय बीतने के साथ महंगाई बढ़ी, आय में बदलाव आया और रुपये की वैल्यू में भी गिरावट हुई। इसी के साथ सोने की कीमत लगातार ऊपर जाती गई।

5,000 रुपये का सोना आज कितना होता?

कल्पना कीजिए कि 1947 में किसी व्यक्ति ने 5,000 रुपये सोने में निवेश किए होते। उस समय की कीमत के हिसाब से 5,000 रुपये में 500 ग्राम से ज्यादा सोना खरीदा जा सकता था।

आज के भाव से देखें तो उस निवेश की कीमत करीब 86 लाख रुपये से अधिक हो सकती थी। यानी लंबे समय में सोने ने निवेशकों को कितनी बड़ी वैल्यू दी है, इसका अंदाजा इस उदाहरण से लगाया जा सकता है।

हालांकि, पुराने और मौजूदा सोने के भाव की सीधी तुलना करते समय उस समय की आय, महंगाई, रुपये की क्रय शक्ति और आर्थिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

सोने-चांदी की कीमतों में जारी है उतार-चढ़ाव

फिलहाल सोने और चांदी के बाजार में लगातार हलचल बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों में जहां कीमतों में तेजी देखने को मिली, वहीं अब कुछ गिरावट भी दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद सोना 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है।

भारत में सोना सिर्फ निवेश का साधन नहीं है, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी है। दिवाली, अक्षय तृतीया, धनतेरस और शादी-विवाह जैसे अवसरों पर आज भी बड़ी संख्या में लोग सोने की खरीदारी करते हैं। जन्मदिन, सालगिरह और अन्य शुभ मौकों पर भी गोल्ड खरीदने की परंपरा कई परिवारों में कायम है।

इसी वजह से आम लोगों की नजर लगातार सोने और चांदी के भाव पर बनी रहती है। खासकर जब कीमतों में गिरावट आती है, तो खरीदार बेहतर भाव पर गोल्ड खरीदने के मौके का इंतजार करते हैं।

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