होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का नया दांव, 60 दिन की चेतावनी के बाद टोल टैक्स की बात से बढ़ा तनाव

Saroj kanwar
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US-Iran War Update: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। ईरान ने घोषणा की है कि उसने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को दोबारा बंद करने का फैसला किया है। तेहरान का कहना है कि लेबनान में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई और संघर्ष खत्म कराने के वादों को निभाने में अमेरिका की विफलता इस कदम की मुख्य वजह है।

ईरान के अनुसार, अमेरिका पर भरोसा कम होने के कारण उसे यह फैसला लेना पड़ा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद इस समुद्री मार्ग से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हुई थी।

ट्रंप की सख्त चेतावनी, 60 दिन का अल्टीमेटम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि अगले 60 दिनों के भीतर दोनों देशों के बीच स्थायी शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अपना समुद्री शुल्क (Maritime Toll) लागू कर सकता है।

हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के तहत दो महीने तक जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, अमेरिका के भीतर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच ट्रंप ने यह नई चेतावनी जारी की है।

अमेरिका ने बताया सुरक्षा की कीमत वसूलने का आधार

कैंप डेविड से जारी अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि 60 दिनों की अवधि के दौरान या उसके बाद किसी अन्य देश को समुद्री टैक्स वसूलने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि वह राशि सीधे अमेरिका को न मिले।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना मध्य पूर्व के देशों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है और एक “गार्जियन एंजेल” की तरह काम करती है। ऐसे में क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और सैन्य अभियानों पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए यह शुल्क उचित है।

स्विट्जरलैंड में अहम वार्ता, पाकिस्तान और कतर निभाएंगे मध्यस्थ की भूमिका

इस बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण कूटनीतिक बातचीत शुरू होने जा रही है। इस वार्ता में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

बातचीत का मुख्य उद्देश्य एक व्यापक परमाणु समझौते को अंतिम रूप देना और क्षेत्रीय तनाव को कम करना है। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलीबाफ समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होने वाले हैं।

ईरान पहले भी दे चुका है समुद्री मार्ग बंद करने की धमकी

विश्लेषकों के मुताबिक, अंतरिम समझौते के बाद भी दोनों देशों के बीच अविश्वास बना हुआ है। लेबनान में हालिया इजरायली हमलों के बाद ईरान के सैन्य नेतृत्व ने होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए बंद करने की चेतावनी दी थी।

तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने अपने कूटनीतिक वादों का पालन नहीं किया। ईरान का कहना है कि शुरुआती समझौते के तहत सभी मोर्चों पर तत्काल संघर्ष विराम लागू होना चाहिए था।

तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

हालांकि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर ईरान के किसी विशेष अधिकार के दावे को खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि पश्चिमी नौसैनिक बलों की निगरानी में समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी है।

रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया विवाद के बावजूद कई व्यापारिक जहाज लाखों बैरल तेल लेकर सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुके हैं। फिर भी खाड़ी के अरब देशों को आशंका है कि नए समुद्री नियम या अतिरिक्त शुल्क वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

अब दुनिया की नजर स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्ता पर टिकी है, जहां राजनयिकों के सामने न केवल क्षेत्रीय तनाव कम करने बल्कि संभावित आर्थिक संकट को टालने की भी बड़ी चुनौती होगी।

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