लोन लेने वाले की मौत के बाद क्या बैंक कर्ज माफ कर देता है? जानिए पूरा नियम

Saroj kanwar
8 Min Read

अगर किसी व्यक्ति ने लोन लिया हो और अचानक उसकी मृत्यु हो जाए, तो क्या उसके साथ लोन की जिम्मेदारी भी खत्म हो जाती है? क्या परिवार को EMI चुकानी पड़ती है? Legal Heir, Co-Borrower और Guarantor में क्या अंतर है? और अगर लोन के साथ Insurance लिया गया हो तो उसका क्या फायदा मिलता है?

ऐसे सवाल अक्सर लोगों के मन में आते हैं। हालांकि, लोन खत्म होने या उसकी जिम्मेदारी तय होने का नियम इस बात पर निर्भर करता है कि लोन Unsecured है या Secured, साथ ही उसमें Co-Borrower, Guarantor और Insurance जैसी शर्तें क्या हैं। आइए अलग-अलग तरह के लोन के जरिए समझते हैं।

क्रेडिट कार्ड का बकाया कौन चुकाएगा?

क्रेडिट कार्ड से लिया गया पैसा आमतौर पर Unsecured Debt होता है। यानी इसके बदले कोई संपत्ति बैंक के पास गिरवी नहीं रखी जाती। हालांकि, कुछ क्रेडिट कार्ड FD के बदले भी जारी किए जाते हैं।

अगर कार्डधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के सदस्यों को अपनी जेब से क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने की जिम्मेदारी आम तौर पर नहीं होती। लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि बैंक हर स्थिति में अपना पैसा छोड़ देता है।

अगर मृतक के नाम पर कोई संपत्ति, निवेश, बचत, FD, शेयर या अन्य एसेट मौजूद हैं, तो बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत बकाया वसूलने का दावा कर सकता है। परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या रेफरेंस देने वाले व्यक्ति को सिर्फ इस वजह से कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता कि वे मृतक को जानते थे।

स्थिति और बैंक की प्रक्रिया के आधार पर बकाया रकम को अंततः बंद या write-off किया जा सकता है।

पर्सनल लोन की जिम्मेदारी

पर्सनल लोन भी आमतौर पर Unsecured Loan होता है। इसमें बैंक ग्राहक की आय, क्रेडिट हिस्ट्री और repayment capacity जैसी चीजों के आधार पर कर्ज देता है।

अगर पर्सनल लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक सामान्य तौर पर मृतक की संपत्ति से बकाया रकम की वसूली का प्रयास कर सकता है। इसमें बैंक बैलेंस, FD, निवेश, जमीन, मकान, आभूषण या दूसरी संपत्तियां शामिल हो सकती हैं।

लेकिन यहां Co-Borrower और Guarantor की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति ने लोन लेते समय Co-Borrower के तौर पर साइन किया है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल Legal Heir होने से अलग होती है। इसी तरह Guarantor ने भी लोन की repayment को लेकर कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार की होती है।

इसलिए ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि लोन एग्रीमेंट में क्या शर्तें लिखी गई हैं।

अक्सर लोग Legal Heir और Co-Borrower को एक समझ लेते हैं, जबकि दोनों की भूमिका अलग है।

Legal Heir वह व्यक्ति है जो कानून के तहत मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकारी हो सकता है। सिर्फ Legal Heir होने से किसी व्यक्ति की निजी कमाई या बचत से मृतक का लोन चुकाने की जिम्मेदारी अपने-आप नहीं बन जाती।

अगर उत्तराधिकारी को मृतक की संपत्ति विरासत में मिलती है, तो उस संपत्ति से जुड़ी देनदारियों का मामला अलग हो सकता है। दूसरी ओर, Co-Borrower ने खुद लोन एग्रीमेंट में borrower के रूप में हिस्सा लिया होता है। इसलिए उसकी जिम्मेदारी केवल विरासत मिलने या न मिलने पर निर्भर नहीं करती।

यही वजह है कि किसी लोन की जिम्मेदारी समझने के लिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि व्यक्ति परिवार का सदस्य है या नहीं।

Home Loan और Car Loan में क्या होगा?

Home Loan और Car Loan, Personal Loan या Credit Card से अलग होते हैं क्योंकि ये आमतौर पर Secured Loans होते हैं। इनके पीछे कोई संपत्ति या वाहन सुरक्षा के रूप में जुड़ा होता है।

Home Loan लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर बैंक सबसे पहले लोन में शामिल Co-Applicant या Co-Borrower से repayment को लेकर संपर्क कर सकता है। अगर repayment नहीं होती, तो बैंक लोन एग्रीमेंट और लागू कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।

Car Loan में भी वाहन लोन की सुरक्षा से जुड़ा होता है। अगर EMI लगातार नहीं चुकाई जाती, तो lender अपने अधिकारों और लागू नियमों के तहत वाहन पर कार्रवाई कर सकता है।

Guarantor की जिम्मेदारी क्या होती है?

किसी लोन में Guarantor बनना केवल औपचारिकता नहीं है। Guarantor लोन की repayment के संबंध में एक कानूनी दायित्व स्वीकार करता है।

अगर मुख्य borrower की मृत्यु हो जाती है और लोन की रकम का भुगतान नहीं होता, तो लोन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार lender Guarantor से भी भुगतान की मांग कर सकता है।

इसलिए किसी रिश्तेदार या दोस्त के कहने पर बिना शर्तें समझे Guarantor बनना जोखिम भरा हो सकता है।

Loan Insurance होने पर क्या होता है?

लोन लेते समय अगर Loan Protection Insurance लिया गया है, तो borrower की मृत्यु जैसी पॉलिसी में कवर की गई स्थिति में Insurance Company, पॉलिसी की शर्तों और कवरेज के अनुसार बकाया लोन का भुगतान कर सकती है।

ऐसी स्थिति में परिवार पर EMI का बोझ काफी कम हो सकता है और Secured Loan में संपत्ति को लेकर जोखिम भी कम हो सकता है। हालांकि, हर Insurance Policy में समान कवरेज नहीं होता। इसलिए पॉलिसी की terms, exclusions और insured amount को ध्यान से समझना जरूरी है।

EMI नहीं भरने पर बैंक क्या कर सकता है?

अगर borrower की मृत्यु के बाद भी लोन की repayment नहीं होती और कोई वैध repayment arrangement नहीं बनता, तो lender recovery की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

Secured Loan में लगातार default होने की स्थिति में लागू नियमों के अनुसार lender संपत्ति या वाहन के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। Home Loan जैसे मामलों में SARFAESI Act के तहत भी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है, लेकिन यह परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि “लोन लेने वाले की मौत हुई तो लोन अपने-आप खत्म हो गया।”

आखिर परिवार को लोन कब चुकाना पड़ सकता है?

इसका सीधा जवाब है—यह लोन के प्रकार, Loan Agreement, Co-Borrower/Guarantor की मौजूदगी, मृतक की संपत्ति और Insurance Coverage पर निर्भर करता है।

Legal Heir को केवल उत्तराधिकारी होने के कारण अपनी व्यक्तिगत संपत्ति से मृतक का लोन चुकाने की जिम्मेदारी सामान्य तौर पर नहीं मिल जाती। लेकिन अगर उसे मृतक की संपत्ति विरासत में मिलती है, तो उस संपत्ति से जुड़ी देनदारियों का कानूनी असर पड़ सकता है।

वहीं Co-Borrower या Guarantor की स्थिति अलग होती है, क्योंकि उन्होंने लोन लेते समय खुद अनुबंध में जिम्मेदारी स्वीकार की होती है।

इसलिए किसी भी लोन के मामले में “आदमी खत्म तो EMI खत्म” वाला नियम मान लेना सही नहीं है। लोन लेने से पहले Agreement, Insurance और अपनी भूमिका—Borrower, Co-Borrower या Guarantor—की शर्तों को अच्छी तरह समझना सबसे जरूरी है।

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