रिफंड क्यों रुक जाता है? जानिए 5 बड़ी वजहें और ऐसे चेक करें स्टेटस

Saroj kanwar
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नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद अगर आपको रिफंड मिलना है, तो खाते में पैसे आने का इंतजार स्वाभाविक है। कई टैक्सपेयर्स रिटर्न फाइल करने के बाद लगातार अपने बैंक अकाउंट और मोबाइल मैसेज चेक करते रहते हैं। हालांकि, हर किसी का रिफंड तुरंत जारी नहीं होता। कई बार रिफंड आने में देरी तकनीकी समस्या, गलत जानकारी या इनकम टैक्स विभाग की प्रोसेसिंग के कारण हो सकती है।

अगर आपने ITR दाखिल कर दिया है और अभी तक रिफंड नहीं मिला, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि आपका रिटर्न किस स्टेज पर है और रिफंड में देरी की वजह क्या है। आम तौर पर कुछ प्रमुख कारणों की वजह से ITR Refund अटक सकता है।

1. ITR अभी भी Under Processing है

ITR जमा करने के बाद इनकम टैक्स विभाग रिटर्न में दी गई जानकारी को उपलब्ध टैक्स रिकॉर्ड से मिलाता है। जब तक यह प्रोसेस पूरा नहीं होता, तब तक रिफंड जारी नहीं किया जाता।

अगर ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘Return Under Processing’ दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे मामले में प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद ही रिफंड की स्थिति स्पष्ट होगी।

2. बैंक अकाउंट की जानकारी में गड़बड़ी

रिफंड सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। इसलिए बैंक डिटेल्स का सही और वैलिडेटेड होना बेहद जरूरी है।

अगर आपका बैंक अकाउंट ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-वैलिडेट नहीं है, PAN से संबंधित जानकारी में समस्या है या अकाउंट नंबर और IFSC जैसी डिटेल गलत दर्ज हो गई है, तो रिफंड ट्रांसफर में दिक्कत आ सकती है।

ऐसी स्थिति में पोर्टल पर बैंक अकाउंट की जानकारी दोबारा जांचना और जरूरत पड़ने पर उसे अपडेट या प्री-वैलिडेट करना चाहिए।

3. ITR में दी गई जानकारी में गलती

ITR भरते समय आय, टैक्स डिडक्शन, बैंक डिटेल्स या अन्य जानकारी में हुई छोटी गलती भी रिफंड की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

यदि रिटर्न में दर्ज आंकड़ों और टैक्स विभाग के रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो रिटर्न की प्रोसेसिंग रुक सकती है। गलती होने की स्थिति में लागू नियमों के अनुसार रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करके जानकारी को ठीक किया जा सकता है।

4. TDS और Form 26AS/AIS में अंतर

ITR Refund अटकने की एक आम वजह TDS से जुड़ा डेटा मिसमैच भी है। टैक्सपेयर ने जितने TDS का दावा किया है, अगर वह Form 26AS या Annual Information Statement (AIS) में दर्ज जानकारी से मेल नहीं खाता, तो विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है।

इसलिए ITR दाखिल करने से पहले TDS की जानकारी को Form 26AS और AIS से मिलाना उपयोगी रहता है। अगर आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है, तो संबंधित संस्था या नियोक्ता से जानकारी ठीक कराने की जरूरत पड़ सकती है।

5. ITR की जांच या Scrutiny होना

कुछ रिटर्न को विभाग अतिरिक्त जांच के लिए चुन सकता है। ऐसा किसी महत्वपूर्ण डेटा मिसमैच या अन्य कारणों से हो सकता है।

अगर आपका ITR Scrutiny के लिए चुना गया है, तो रिफंड जारी होने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। विभाग की ओर से कोई नोटिस, ई-मेल या अन्य सूचना प्राप्त होने पर उसमें दिए निर्देशों के अनुसार समय पर जवाब देना जरूरी है।

ITR Refund Status ऑनलाइन कैसे चेक करें?

रिफंड की स्थिति जानने के लिए आपको किसी ऑफिस जाने की जरूरत नहीं है। इसे इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल से ऑनलाइन चेक किया जा सकता है।

स्टेटस देखने का तरीका:

  1. इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं।
  2. अपने PAN/User ID और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें।
  3. e-File सेक्शन में जाएं।
  4. Income Tax Returns पर क्लिक करें।
  5. इसके बाद View Filed Returns विकल्प चुनें।
  6. जिस Assessment Year का रिटर्न देखना है, उसे चुनें।
  7. यहां आपके ITR की मौजूदा स्थिति और रिफंड से संबंधित जानकारी दिखाई देगी।

अगर रिफंड जारी हो चुका है, तो पोर्टल पर भुगतान की तारीख और संबंधित ट्रांजैक्शन जानकारी भी दिखाई दे सकती है। वहीं, रिफंड फेल या रिजेक्ट होने की स्थिति में संबंधित कारण भी चेक किया जा सकता है।

इसलिए ITR Refund में देरी होने पर सबसे पहले अपने रिटर्न का स्टेटस, बैंक डिटेल्स, TDS रिकॉर्ड और विभाग की ओर से आए किसी नोटिस को जरूर जांचें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि रिफंड किस वजह से रुका है और आगे क्या कदम उठाना है।

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