राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्रा की चाची ने खोली पोल, सामने आए कई महंगे प्लॉट और लग्जरी फ्लैट के सौदे

Saroj kanwar
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कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को रिटायरमेंट के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद बचत विकल्पों में माना जाता है। लेकिन कई लोग अचानक जरूरत या छोटे खर्चों के लिए अपने PF खाते से पैसा निकाल लेते हैं, जो आगे चलकर भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में EPF से निकासी करने पर कंपाउंड इंटरेस्ट का असर कम हो जाता है, जिससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल रकम में बड़ा अंतर आ सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 28 साल की उम्र में 1 लाख रुपये निकाल लेता है, तो लंबे समय में यह रकम कई लाख रुपये के संभावित रिटर्न से वंचित कर सकती है।

EPF नियमों के मुताबिक, इसका पैसा मुख्य रूप से रिटायरमेंट, मेडिकल इमरजेंसी, घर खरीदने या शिक्षा जैसे जरूरी कारणों के लिए ही निकालना बेहतर माना जाता है। अनावश्यक निकासी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर सकती है।

इसलिए वित्तीय सलाहकार हमेशा सलाह देते हैं कि EPF को आखिरी विकल्प के तौर पर ही उपयोग करें और इसे लंबी अवधि की बचत के रूप में बनाए रखें।


राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में नया खुलासा, अनुकल्प मिश्रा पर गंभीर आरोप

अयोध्या से जुड़े राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में आरोपी अनुकल्प मिश्रा को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। उनके गांव बसावां में उनकी दबंग छवि और प्रभाव को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार, अनुकल्प पर आरोप है कि वह अपने रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल कर कई काम मनमाने तरीके से करवाता था। स्थानीय लोगों और परिजनों के अनुसार, मंदिर से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के सहयोग से उसका प्रभाव और भी बढ़ गया था।

उसकी चाची नेहा मिश्रा ने आरोप लगाया है कि गबन मामले के उजागर होने के बाद कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। उन्होंने दावा किया कि कम समय में उसने कई महंगी जमीनें खरीदीं और अपने रिश्तेदारों को मंदिर से जुड़ी नौकरियों में भी नियुक्त कराया। इसके अलावा नोएडा में फ्लैट खरीदने का भी आरोप सामने आया है।

नेहा मिश्रा के अनुसार, पारिवारिक विवाद और संपत्ति से जुड़े मामलों के बीच कई बार हिंसा की घटनाएं भी हुईं। उन्होंने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया है।

बताया जा रहा है कि मंदिर में नौकरी मिलने के बाद अनुकल्प ने अपने कई करीबियों को आर्थिक रूप से मदद भी की और संपत्ति निवेश में तेजी आई। मामले में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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