बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और एनसीआर के अन्य शहरों की ओर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए कन्फर्म ट्रेन टिकट हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। खासकर त्योहारों के समय ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी सीट कन्फर्म करवाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
यात्रियों का कहना है कि रेलवे की ओर से नियम और बुकिंग सिस्टम तो तय हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ के अनुपात में ट्रेनों और सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। इसका सीधा असर आम यात्रियों की सुविधा पर पड़ रहा है।
1-2 महीने पहले बुकिंग के बाद भी वेटिंग लिस्ट का झंझट
बिहार और यूपी के कई प्रमुख रूटों पर स्थिति यह है कि यात्रियों को यात्रा से करीब डेढ़ से दो महीने पहले ही टिकट बुक करने की कोशिश करनी पड़ती है। इसके बावजूद कन्फर्म सीट मिलना आसान नहीं होता।
दिल्ली, नई दिल्ली, आनंद विहार, गाजियाबाद और एनसीआर के प्रमुख स्टेशनों की ओर जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है। कई बार वेटिंग लिस्ट 100 से 300 तक पहुंच जाती है, और टिकट आरक्षण शुरू होते ही सीटें फुल हो जाती हैं।
ऑनलाइन बुकिंग में भी यात्रियों को परेशानी
जोगबनी से गाजियाबाद अपनी बेटी से मिलने आए एक यात्री ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग के दौरान अक्सर रेलवे की वेबसाइट पर सीटें उपलब्ध ही नहीं दिखतीं। मजबूरी में उन्हें एजेंट के जरिए 3AC टिकट लेना पड़ा, जिसमें अतिरिक्त पैसे भी देने पड़े।
यात्रियों का यह भी कहना है कि कई बार ट्रेन में खाली सीटें नजर आती हैं, लेकिन इसके बावजूद कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। इससे लोगों में व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
तत्काल टिकट भी नहीं बना आसान विकल्प
जब किसी जरूरी काम, मेडिकल इमरजेंसी या पारिवारिक कारण से तुरंत यात्रा करनी हो, तो यात्रियों के पास सीमित विकल्प बचते हैं। तत्काल टिकट के लिए भारी प्रतिस्पर्धा होती है और कुछ ही मिनटों में सभी सीटें बुक हो जाती हैं।
ऐसे में कई यात्री एजेंटों या वेंडरों पर निर्भर हो जाते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। कुछ लोग बस या निजी वाहनों का सहारा लेते हैं, जबकि कई लोग महंगे हवाई टिकट लेने को मजबूर हो जाते हैं।
बिहार-यूपी से दिल्ली रूट पर क्यों है इतनी भीड़?
बिहार और पूर्वांचल से दिल्ली-एनसीआर के बीच बड़ी संख्या में मजदूर, छात्र, नौकरीपेशा और कारोबारी नियमित यात्रा करते हैं। यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन ट्रेनों और सीटों की उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है।
इसी वजह से कई प्रमुख ट्रेनों में बुकिंग खुलते ही सीटें भर जाती हैं और लंबी वेटिंग लिस्ट बन जाती है।
यात्रियों की मांग: बढ़ाई जाएं ट्रेनें और सीटें
यात्रियों का सुझाव है कि इस रूट पर अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जाए और जिन ट्रेनों में लगातार भीड़ रहती है, उनमें अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं। इससे दबाव कम होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी।
लोगों का मानना है कि जब तक मांग के अनुसार ट्रेनों और सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक कन्फर्म टिकट की समस्या बनी रहेगी और यात्रियों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ेगी।
कुल मिलाकर, बिहार और पूर्वांचल से दिल्ली की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कन्फर्म टिकट आज भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। बढ़ती मांग और सीमित सीटों के बीच संतुलन न होने की वजह से स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है, और यात्रियों को बेहतर सुविधा की उम्मीद है।