भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लगभग हर परिवार या आसपास किसी न किसी व्यक्ति को मधुमेह की समस्या होती है। अक्सर ऐसे मरीज कहते हैं, “मैं तो चीनी और मिठाई बिल्कुल नहीं खाता, फिर भी ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहती।” यह सवाल काफी आम है, लेकिन इसका जवाब सिर्फ मीठा खाने से जुड़ा नहीं है।
बीएलके मैक्स अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र कुमार सिंगल के अनुसार, केवल चीनी छोड़ देना ही ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। कई ऐसी खानपान और लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें हैं, जो बिना मीठा खाए भी ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ा सकती हैं।
सिर्फ चीनी नहीं, ये चीजें भी बढ़ाती हैं ब्लड शुगर
अधिकांश लोगों की धारणा होती है कि केवल मिठाई, चीनी या मीठे पेय पदार्थ ही ब्लड शुगर बढ़ाते हैं। इसी वजह से कई डायबिटीज मरीज मीठी चीजें पूरी तरह छोड़ देते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी फास्टिंग और भोजन के बाद की शुगर सामान्य नहीं रहती।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट हो सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर में बहुत तेजी से पचकर ग्लूकोज में बदल जाते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है।
इन खाद्य पदार्थों से सावधानी बरतनी चाहिए—
- मैदा से बनी चीजें
- सफेद चावल
- प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड
- अधिक तेल और चिकनाई वाले खाद्य पदार्थ
तनाव भी बिगाड़ सकता है ब्लड शुगर
अगर कोई व्यक्ति संतुलित और पौष्टिक भोजन ले रहा है, फिर भी उसका ब्लड शुगर बढ़ रहा है, तो इसकी वजह केवल डाइट नहीं हो सकती। मानसिक या शारीरिक तनाव भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण है।
तनाव की स्थिति में शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इससे इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और लिवर में जमा ग्लाइकोजन ग्लूकोज में बदलकर रक्त में पहुंचने लगता है। परिणामस्वरूप ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
कम नींद लेने से भी बढ़ सकता है शुगर लेवल
अच्छी नींद का सीधा संबंध ब्लड शुगर कंट्रोल से है। यदि कोई व्यक्ति रोजाना सात घंटे से कम सोता है, तो उसकी बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम प्रभावित हो सकती है।
नींद की कमी के कारण शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में अग्न्याशय द्वारा बनने वाले इंसुलिन का प्रभाव कम हो सकता है और ब्लड शुगर नियंत्रित रखना मुश्किल हो जाता है।
कुछ दवाएं भी बन सकती हैं कारण
विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ दवाओं का असर भी ब्लड शुगर पर पड़ सकता है। खासतौर पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, डाईयुरेटिक्स और बीटा-ब्लॉकर्स जैसी दवाएं इंसुलिन के स्राव या उसकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। यदि कोई डायबिटीज मरीज इन दवाओं का सेवन कर रहा है, तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए।
इन्फेक्शन होने पर भी बढ़ सकता है ग्लूकोज
शरीर में किसी प्रकार का संक्रमण, जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या श्वसन तंत्र का संक्रमण, भी ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। संक्रमण के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सक्रिय हो जाती है, जिससे कई हार्मोनल बदलाव होते हैं और रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है।
ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए क्या करें?
डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल चीनी छोड़ना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ संतुलित आहार, रिफाइंड कार्ब्स से दूरी, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का सही समय पर सेवन भी जरूरी है। यदि इन सभी बातों का ध्यान रखा जाए, तो ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।