भारत में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, धूम्रपान, शराब का सेवन और बढ़ता प्रदूषण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कई बार कैंसर की शुरुआत ऐसे सामान्य लक्षणों से होती है जिन्हें लोग गैस, संक्रमण या मामूली स्वास्थ्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (NICPR) के अनुसार, भारत में हर वर्ष लगभग 14 से 16 लाख नए कैंसर के मामले सामने आते हैं। वहीं, राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) के आंकड़े बताते हैं कि देश में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऐसे में शरीर के शुरुआती संकेतों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है।
दिल्ली के मैक्स स्मार्ट हॉस्पिटल, साकेत के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. पी. के. दास के अनुसार, यदि शरीर में कुछ खास बदलाव लंबे समय तक बने रहें, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
1. मल या पेशाब की आदतों में लगातार बदलाव
अगर कई दिनों तक कब्ज, दस्त, बार-बार पेशाब आने की समस्या या मल और पेशाब की आदतों में लगातार बदलाव बना रहे, तो इसे केवल खानपान की गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज न करें। यह कुछ मामलों में आंत या मूत्र मार्ग से जुड़े कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है।
2. ऐसा घाव जो लंबे समय तक न भरे
यदि त्वचा पर बना कोई घाव, मुंह का छाला या कोई जख्म लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है, तो यह सामान्य समस्या नहीं भी हो सकती। लगातार बने रहने वाले ऐसे घाव त्वचा या मुंह के कैंसर का संकेत हो सकते हैं।
3. असामान्य रक्तस्राव को न करें नजरअंदाज
खांसी के साथ खून आना, मल में खून दिखाई देना या महिलाओं में सामान्य से अलग रक्तस्राव जैसी स्थितियां गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
4. शरीर में नई गांठ या सूजन महसूस होना
यदि ब्रेस्ट, गर्दन, अंडकोष या शरीर के किसी भी हिस्से में बिना कारण गांठ या सूजन महसूस हो, तो उसकी जांच जरूर कराएं। कैंसर से जुड़ी कई गांठों में शुरुआती चरण में दर्द नहीं होता, इसलिए केवल दर्द न होना सुरक्षित होने का संकेत नहीं माना जा सकता।
5. लंबे समय तक अपच या निगलने में परेशानी
अगर बार-बार अपच की शिकायत रहती है, खाना निगलने में कठिनाई होती है या पेट हमेशा भरा हुआ महसूस होता है, तो इसे सिर्फ एसिडिटी समझकर नजरअंदाज न करें। यह पेट या भोजन नली से जुड़े कैंसर का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।
6. कई हफ्तों तक खांसी या आवाज में बदलाव
यदि लगातार कई सप्ताह तक खांसी बनी रहे या आवाज बैठी रहे और उसमें सुधार न हो, तो इसकी चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। यह फेफड़ों, गले या थायरॉयड से जुड़े कैंसर का संकेत हो सकता है।
समय पर पहचान से बढ़ जाती है इलाज की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो इलाज अधिक प्रभावी होता है और मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है। इसलिए शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में लेने के बजाय समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का लंबे समय तक अनुभव हो रहा है, तो योग्य डॉक्टर से जांच और परामर्श अवश्य लें।