हर साल सर्दियों के मौसम में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिससे लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। धुंध और स्मॉग के कारण हवा जहरीली हो जाती है, जिससे खांसी, जुकाम और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि अभी सर्दियों का समय दूर है, लेकिन दिल्ली सरकार ने अभी से इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जून में ही “प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क” को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य सर्दियों में प्रदूषण को नियंत्रित करना है। सरकार का यह सख्त “विंटर एंटी-पॉल्यूशन प्लान” 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा।
वर्क फ्रॉम होम और ऑफिस टाइमिंग में बदलाव
सरकार प्रदूषण कम करने के लिए ऑफिस के समय में बदलाव और 50% वर्क फ्रॉम होम नीति लागू करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य सड़कों पर ट्रैफिक कम करना है।
प्रमुख सख्त कदम:
- PUC सर्टिफिकेट अनिवार्य: बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा।
- बाहरी वाहनों पर रोक: गैर-BS-VI कमर्शियल वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लग सकता है।
- पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी: भीड़ और ट्रैफिक कम करने के लिए पार्किंग चार्ज दोगुना किया जा सकता है।
- निर्माण कार्य पर रोक: 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर रोक लग सकती है।
- कचरा जलाने पर कार्रवाई: खुले में कचरा जलाने पर ड्रोन और फील्ड मॉनिटरिंग के जरिए सख्त कार्रवाई होगी।
सरकार का यह पूरा प्लान पहले से तैयार किया गया है ताकि प्रदूषण बढ़ने पर तुरंत आपात कदम उठाने की जरूरत न पड़े, बल्कि समय रहते ही स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।