तेल की कीमतों में 20 रुपये की बढ़ोतरी

Saroj kanwar
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तेल की कीमतों में बढ़ोतरी: आम लोगों के लिए बड़ा झटका। ईरान-इजराइल युद्ध से पहले हर तरफ अफरा-तफरी मची हुई है। पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति का सीधा असर खाद्य तेल और सूखे मेवों के बाजारों पर पड़ रहा है। देहरादून में रिफाइंड तेल की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है, वहीं ईरानी पिस्ता की कीमत 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई है। अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में महंगाई और भी बढ़ सकती है।

आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित
दरअसल, भारत में ताड़ के तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। पिछले दो महीनों से चल रहे संघर्षों और तनावों ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। कंपनियों ने धीरे-धीरे अपना स्टॉक खत्म कर दिया है और नए शिपमेंट ऊंची कीमतों पर आ रहे हैं। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ रहा है।

प्रतिष्ठित कंपनियों का रिफाइंड तेल, जिसकी कीमत दो महीने पहले 150 से 160 रुपये प्रति लीटर थी, अब बढ़कर 170 से 180 रुपये प्रति लीटर हो गई है। तेल की बढ़ती कीमतों से गृहिणियों के मासिक बजट पर विशेष रूप से दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा, होटल और रेस्तरां मालिक भी बिगड़ते संकट से जूझ रहे हैं। गैस की कमी के बाद, तेल की कीमतों में उछाल ने पूरे रसोई उद्योग को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

आपूर्ति में व्यवधान के कारण बाजार में अस्थिरता
दून के कारोबारी मोहित रघुवंशी का कहना है कि खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित होने के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। उनका चेतावनी भरा कहना है कि अगर जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए तो रिफाइंड तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि ईरानी पिस्ता भी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। आपूर्ति कम होने से पिस्ता की कीमत 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई है। फिलहाल बाजार में ये लगभग 3,400 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे हैं।

आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह महंगाई सिर्फ सूखे मेवों या ब्रांडेड तेलों तक ही सीमित नहीं रहेगी। अगर खाड़ी देशों में हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों, मिठाइयों, स्नैक्स और आतिथ्य क्षेत्र पर भी पड़ेगा। कारोबारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में खाने की लागत और भी बढ़ सकती है। एक हफ्ते के अंदर ही खाने के तेल की कीमत 20 से 30 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई है। व्यापारी जगदीश नेगी, रमेश सिंह, सूरज जोशी, हेम परिहार आदि ने बताया कि महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

आने वाले समय में अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी वृद्धि होने की संभावना है। बताया गया कि सरसों का तेल पहले विभिन्न किस्मों के हिसाब से 150 से 170 रुपये प्रति लीटर मिलता था। अब यह 160 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 200 रुपये प्रति लीटर हो गया है। रिफाइंड तेल की कीमत 140 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति लीटर और तिल के तेल की कीमत 160 रुपये से बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

महंगाई के डर के बीच जिला आपूर्ति विभाग भी सतर्क हो गया है। तेल की जमाखोरी रोकने के लिए जिला आपूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल ने क्षेत्रीय आपूर्ति निरीक्षकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कृत्रिम संकट पैदा करने या कालाबाजारी की शिकायतें मिलने पर तत्काल कार्रवाई करें।

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