नीट-यूजी 2026 पेपर लीक केस में शनिवार को दिल्ली कोर्ट के बाहर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इस मामले की कथित मास्टरमाइंड मानी जा रही मनीषा मंढारे जब कोर्ट पहुंची तो मीडिया कैमरों से बचती नजर आई। इसी बीच इंडिया टुडे ग्रुप के हाथ लगे रिमांड नोट ने पूरे कथित एग्जाम स्कैम की कई चौंकाने वाली परतें खोल दी हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मनीषा मंढारे पर आरोप है कि उसने मोटी रकम लेकर कुछ चुनिंदा छात्रों को NEET-UG 2026 परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया। रिमांड नोट में दावा किया गया है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। मामले की जांच कर रही CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक का यह नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
सूत्रों के अनुसार, जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि पेपर लीक की साजिश बेहद संगठित तरीके से रची गई थी। कथित तौर पर परीक्षा से पहले ही कुछ छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। इसके बदले बड़ी रकम वसूले जाने की बात भी सामने आई है।
दिल्ली कोर्ट में पेशी के दौरान मनीषा मंढारे मीडिया के सवालों से बचती दिखीं। वहीं, CBI ने कोर्ट से हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि मामले में अभी कई अहम कड़ियां जोड़नी बाकी हैं। एजेंसी को शक है कि इस रैकेट में कई अन्य लोग और संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं।
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसे आरोपों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल CBI पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।