सीबीएसई (CBSE) कक्षा 12वीं के रिजल्ट जारी होने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने कम अंक आने और पास प्रतिशत में गिरावट को लेकर चिंता जताई थी। इसी बीच बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर बड़ा अपडेट दिया है, जिससे छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
बोर्ड ने साफ किया है कि यदि दोबारा कॉपी जांच (Re-evaluation) के दौरान किसी छात्र के अंक बढ़ते हैं, तो उससे ली गई पूरी री-चेकिंग फीस वापस कर दी जाएगी। इस फैसले को छात्रों के हित में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सीबीएसई अधिकारियों के मुताबिक, मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। बोर्ड ने कहा कि यह कोई नई तकनीक नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से इसका उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग के जरिए परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे जांच प्रक्रिया तेज और अधिक निष्पक्ष बनती है। इसके साथ ही मानवीय गलतियों की संभावना भी कम हो जाती है।
हालांकि रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने उम्मीद से कम अंक मिलने की शिकायत की थी। सोशल मीडिया पर भी छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। इसी को देखते हुए बोर्ड ने पूरी प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जारी किया।
सीबीएसई ने यह भी कहा कि छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि किसी को अपने अंकों को लेकर संदेह है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली भविष्य में रिजल्ट प्रक्रिया को और अधिक भरोसेमंद बना सकती है। वहीं, फीस रिफंड का फैसला छात्रों के बीच विश्वास बढ़ाने का काम करेगा।